पांच दशक पूर्व हुई थी ढ़ाका मोड़ में दुर्गा पूजा की शुरुआत

फोटो 24 बांका 15 : आरती लगाते श्रद्धालु ढाका मोड़ मंदिर का भव्य पंडाल और आरती में शामिल श्रद्धालु. प्रतिनिधि, बाराहाटचैती नवरात्र के मौके पर क्षेत्र के दुर्गा मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगनी शुरू हो गयी है. मंगलवार को सुबह सवेरे से ही ढाका मोड़ स्थित दुर्गा मंदिर में देवी के कुष्मांडा रूप की […]

फोटो 24 बांका 15 : आरती लगाते श्रद्धालु ढाका मोड़ मंदिर का भव्य पंडाल और आरती में शामिल श्रद्धालु. प्रतिनिधि, बाराहाटचैती नवरात्र के मौके पर क्षेत्र के दुर्गा मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगनी शुरू हो गयी है. मंगलवार को सुबह सवेरे से ही ढाका मोड़ स्थित दुर्गा मंदिर में देवी के कुष्मांडा रूप की पूजा अर्चना करने को लेकर भक्तों की लंबी कतार लगी थी.ढाका मोड़ स्थित दुर्गा मंदिर का इतिहास तकरीबन पांच दशक पुराना है. स्थानीय जानकार चंद्रशेखर यादव बताते हैं कि यहां पूर्व के दिनों में तकरीबन 71-72 इस्वी में जमींदार कृ ष्ण शंकर सहाय ने करतार से आकर दुर्गा मां की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की थी. कालांतर में जैसे – जैसे जमींदारी प्रथा समाप्त होती गयी, जमींदार के वंशजों ने यहां अपनी संपत्ति बेच दी और मंदिर में लगभग पूजा समाप्त हो गयी.यहां जमींदारी खत्म होने के साथ मंदिर के गिरने का सिलसिला भी शुरू हो गया और 80 का दशक आते-आते पूजा यहां पूर्णत: बंद हो गयी. स्थानीय लोग बताते हैं कि जब काफी दिनों तक मंदिर की कोई सुधि लेने वला नहीं रहा, तब झारखंड के गोड्डा जिलेके विधायक और ढाका गांव निवासी संजय यादव ने पूजा का बीड़ा उठाया. इसके साथ ही उन्होंने पुराने मंदिर के स्थान पर भव्य मंदिर की आधारशिला रखी और तब से उत्तरोत्तर पूजा में एक के बाद एक परिवर्तन देखने को मिलते रहे. चैती नवरात्र को लेकर आकर्षक ढंग से माता का दरबार सजाया गया है. इसकी एक झलक देखने के लिए शाम होते ही भक्तों का रेला मंदिर परिसर में उमड़ने लगता है. सजावट में झारखंड एवं बंगाल के कई नामी कारीगर लगे हुए हैं.

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