फोटो 13 बांका 9 : आंगनबाड़ी केंद्र में खेलते बच्चे प्रतिनिधि, बौंसीप्रखंड क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति इतनी दयनीय है कि बच्चे अपना नाम तक नहीं बता पाते. एक तो केंद्र कभी समय पर नहीं खुलते, दूसरे मात्र पांच या छह बच्चे ही उपस्थित रहते हैं. हालांकि सेविका 30 से 40 बच्चों की उपस्थिति पंजी में दिखाती हैं. शुक्रवार को गोकुला पंचायत के सहसराम गांव के केंद्र संख्या-98 सुबह के 11 बजे खुल ही रहा था. केंद्र में ना तो सेविका थी और ना ही सहायिका. नौनिहाल खेतों में इधर-उधर दौड़ रहे थे. इस नवनिर्मित केंद्र से सटा एक बड़ा कुआं है, जिसकी वजह से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. केंद्र के अंदर सहायिका मंजू देवी की पुत्री कुरसी पर बैठी केंद्र चलाती दिखी. मौजूद 13 बच्चों में से मात्र दो बच्चे ही पोशाक में दिखे. उपस्थिति पंजी में जनवरी से 11 मार्च तक 30 से 35 बच्चों की उपस्थिति दिखायी गयी है. निरीक्षण पंजी में एलएस श्वेता कुमारी द्वारा पांच फरवरी को निरीक्षण किया गया है, जबकि हस्ताक्षर पांच जनवरी का किया गया है. थोड़ी देर बाद सेविका किरण देवी व सहायिका वहां पहुंचीं. सहायिका व सेविका संसाधन का रोना रोने लगीं. मालुम हो कि इन सुदुर वर्ती इलाकों मंे विभागीय अधिकारियों के नहीं जाने की वजह से इन केंद्रों की ऐसी स्थिति बनी हुई है. इस संबंध में बीडीओ अमर कुमार मिश्रा ने बताया कि सभी आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण किया जायेगा और केंद्र संख्या 98 की जांच करवायी जायेगी.
आंगनबाड़ी केंद्र में बरती जा रही अनियमितता
फोटो 13 बांका 9 : आंगनबाड़ी केंद्र में खेलते बच्चे प्रतिनिधि, बौंसीप्रखंड क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति इतनी दयनीय है कि बच्चे अपना नाम तक नहीं बता पाते. एक तो केंद्र कभी समय पर नहीं खुलते, दूसरे मात्र पांच या छह बच्चे ही उपस्थित रहते हैं. हालांकि सेविका 30 से 40 बच्चों की उपस्थिति […]
