दो दिनों से हो रही रिमझिम बारिश से खरीफ फसल प्रभावित हुई है. अमरपुर प्रखंड क्षेत्र सहित जिले के कई क्षेत्रों में धान फसल पर व्यापक असर पड़ा है. ऐसी स्थिति में किसान पूरी तरह संकट में घिर चुके हैं. धान की फसल को भारी नुकसान हुआ है. कृषि विभाग के मुताबिक शनिवार सुबह आठ बजे तक 17.64 मिली मीटर बारिश हुई है.
बांका : प्रभावित बहियार की बात करें तो धान खेत जलमग्न हो गया है. कई एकड़ खेत में लगातार धान की फसल बिछी पड़ी है. बिछी हुई धान में पूर्ण रुप से बाली भी आ गयी है. समस्या यह है कि बाली के आने के बाद फसल गिरने से उत्पादन में काफी कमी आ जाएगी. दूसरी ओर किसान चिंतित हैं कि पूरी मेहनत के बावजूद अगर धान का उत्पादन सही नहीं हुआ तो वह कर्ज में डूब जाएंगे. प्रभावित क्षेत्र के किसानों की मानें तो स्थिति यह है कि लागत भी उपर होना अब मुश्किल लग रहा है.
ज्ञात हो कि विगत महीने पानी को लेकर चहुंओर हाहाकार मच रहा था. दो अक्तूबर को हुई मूसलाधार बारिश ने सभी कसर को पूरा कर दिया. परंतु हाल में हुई बारिश के बाद फसल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना शुरु हो गया. नदी व नहर का पानी भी सीधे खेत में पहुंच जा रहा है. जिसकी वजह से धान फसल खेत में ही गिर गये हैं. वहीं दूसरी ओर गन्ना फसल को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आ रही है. खास असर अमरपुर प्रखंड क्षेत्र में देखी जा रही है. इस इलाके में कई एकड़ गन्ना फसल खेत में गिर पड़ा है. जिसकी वजह से किसान को दोहरी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. वहीं दूसरी ओर आलम यह रहा तो दलहनी फसल पर भी घोर बुरा असर पड़ सकता है.
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से किसानों को मिलेगी राहत : जिन किसानों का फसल नुकसान हुआ है, वैसे किसान को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से राहत की उम्मीद है. किसान जल्द ही इसका आवेदन संबंधित प्रखंड में जमा करा दें. विभाग नियमानुसार नुकसान का भुगतान करेगी.
धान के उत्पादन पर पड़ेगा असर गन्ना को भी नुकसान
आवेदन दें, नियमानुसार मिलेगी राहत : डीएओ
कुछ क्षेत्र में धान के प्रभावित होने की सूचना मिली है. आंकड़ों का संकलन का निर्देश दिया गया है. किसान प्रभावित फसल को लेकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत आवेदन दे सकते हैं. नियमानुसार उन्हें राहत दी जायेगी.
सुदामा महतो, जिला कृषि पदाधिकारी
डैम व नहर पर नहीं है अभियंताओं की नजर
रजौन मुहरमा नहर से पानी लगातार बर्बाद हो रहा है. कई जगह नहर का बांध भी टूट गया है. जिससे पानी खेत के साथ-साथ यत्र-तत्र खुले में बह रहा है. किसानों की मानें तो यह पानी बिल्कुल किसी काम का नहीं है. अगर संबंधित अभियंता डैम में पानी अगर संचित कर लें और टूटे हुए बांध की मरम्मत सुनिश्चित हो जाए तो यह पानी आगे चलकर रबी फसल के लिए फायदेमंद होगा. परंतु इस दिशा में रत्ती भर ध्यान सिंचाई विभाग का नहीं है.
किसानों ने बताया कि अभियंता अपनी डैम की क्षमता पर नियमित नजर बनाए रखें अगर समस्या जटिल है तो ही पानी को छोड़ें. अन्यथा किसान घोर संकट में पड़ सकते हैं. किसान उमेश वैध, सरगुन दास, अजय मरीक, प्रमोद मरीक सहित अन्य ने बताया कि बारिश की वजह से धान फसल पर बुरा असर पड़ा है. जिला प्रशासन से निवेदन है कि वह प्रभावित फसल पर राहत दें.
