Aurangabad News: (दाउदनगर से ओम प्रकाश) दाउदनगर अनुमंडल मुख्यालय के सबसे व्यस्त भखरुआं मोड़ पर लागू की गई नो इंट्री व्यवस्था अब बेअसर होती नजर आ रही है. सोमवार को फिर से सड़कों पर बसों, ऑटो और ई-रिक्शा का जमावड़ा लग गया. जिससे लोगों को भारी जाम और परेशानी का सामना करना पड़ा. स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए स्थायी समाधान की मांग की है.
फिर सड़कों पर दिखा वाहनों का कब्जा
भखरुआं मोड़ पर सोमवार को पुराने हालात फिर लौट आए. औरंगाबाद रोड,गया जी रोड और पटना रोड पर यात्री बसों और अन्य व्यावसायिक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं. वहीं मौलाबाग बाजार रोड में ई-रिक्शा और ऑटो सड़क किनारे खड़े नजर आए. इससे राहगीरों और आम लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी.
खुलेआम होती रही लोडिंग-अनलोडिंग
नो इंट्री आदेश के बावजूद सड़क किनारे सामान की लोडिंग और अनलोडिंग का काम खुलेआम चलता रहा. मौके पर न तो कोई अधिकारी दिखा और न ही पुलिसकर्मी व्यवस्था संभालते नजर आए. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक आदेश केवल कागजों तक सीमित होकर रह गया है.
फिर पुराने ढर्रे पर लौटी व्यवस्था
गौरतलब है कि पिछले गुरुवार को अनुमंडल दंडाधिकारी सह एसडीओ अमित राजन ने भखरुआं मोड़ पर नो इंट्री व्यवस्था लागू करने का आदेश जारी किया था. इसके तहत शुक्रवार को विशेष अभियान चलाकर 68 हजार 500 रुपये का जुर्माना भी वसूला गया था. शुरुआती एक-दो दिनों तक व्यवस्था का असर दिखा, लेकिन अब स्थिति फिर पहले जैसी हो गई है.
तय किए गए थे वाहन ठहराव स्थल
एसडीओ के आदेश के अनुसार एनएच-139 के औरंगाबाद रोड स्थित डीवीसी बैंक के पास, गया जी रोड में बी मार्ट के समीप, पटना रोड में पीएनबी के पास तथा मौलाबाग बाजार रोड में नहर के पास वाहनों के ठहराव की व्यवस्था तय की गई थी. साथ ही भखरुआं मोड़ पर यात्रियों को चढ़ाने-उतारने और सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक लोडिंग-अनलोडिंग पर रोक लगाई गई थी.
बिना स्थायी व्यवस्था नहीं मिलेगी राहत
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमों को सख्ती से लागू किया जाए तो जाम की समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है. हालांकि लोगों का यह भी मानना है कि प्रशासन को ई-रिक्शा और ऑटो के लिए स्थायी ठहराव स्थल विकसित करना होगा, ताकि यात्रियों को परेशानी न हो.
लोगों में बढ़ी नाराजगी
लोगों का कहना है कि नियमित मॉनिटरिंग और फॉलोअप के अभाव में प्रशासनिक आदेश सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाते हैं. उनका मानना है कि जब तक शहर में स्थायी बस स्टैंड, ऑटो स्टैंड और पार्किंग व्यवस्था विकसित नहीं होगी, तब तक भखरुआं मोड़ की जाम समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है.
