Aurangabad News: (औरंगाबाद से रविकांत पाठक) देव प्रखंड प्रमुख कांति देवी के खिलाफ पंचायत समिति के एक गुट द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था. इसके बाद कार्यपालक पदाधिकारी-सह-प्रखंड विकास पदाधिकारी द्वारा 21 मई 2026 को सुबह 11 बजे विशेष बैठक बुलाने का आदेश जारी किया गया था. बैठक की तैयारी प्रशासनिक स्तर पर चल रही थी, लेकिन पटना हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद बैठक स्थगित कर दी गई .
प्रमुख कांति देवी ने हाई कोर्ट में दी चुनौती
प्रमुख कांति देवी ने विशेष बैठक के आदेश को पटना हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. याचिका में कहा गया कि अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया बिहार पंचायत राज अधिनियम 2006 की धारा 44 के अनुरूप नहीं अपनाई गई. प्रमुख पक्ष ने आरोप लगाया कि प्रस्ताव सीधे प्रमुख को नहीं सौंपा गया, बल्कि कार्यपालक पदाधिकारी-सह-बीडीओ के माध्यम से भेजा गया.
कानून के विपरीत अपनाई गई प्रक्रिया
हाई कोर्ट में प्रमुख पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि अविश्वास प्रस्ताव से जुड़े आरोप अस्पष्ट और आधारहीन हैं. अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के दौरान मामले को गंभीर मानते हुए प्रतिवादी संख्या 6 से 23 तक को साधारण और पंजीकृत डाक के माध्यम से नोटिस जारी करने का आदेश दिया. साथ ही सभी प्रतिवादियों को 19 जून 2026 तक प्रति-हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है.
ग्रामीण विकास विभाग से भी मांगी गई स्थिति स्पष्टता
सुनवाई के दौरान ग्रामीण विकास विभाग के नियमों का भी हवाला दिया गया. कोर्ट ने पंचायती राज विभाग और प्रखंड विकास पदाधिकारी से मामले में स्थिति स्पष्ट करने को कहा है. अगली सुनवाई तक प्रमुख कांति देवी के खिलाफ कोई विशेष बैठक आयोजित नहीं की जाएगी.
हाई कोर्ट के फैसले से गरमाई प्रखंड की राजनीति
हाई कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद देव प्रखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. अविश्वास प्रस्ताव को लेकर दोनों गुटों के बीच चल रही राजनीतिक सक्रियता पर फिलहाल विराम लग गया है, लेकिन आने वाले दिनों में यह मामला और गर्माने की संभावना जताई जा रही है.
