Aurangabad News : शिक्षकों के निलंबन पर भड़के छात्र

Aurangabad News: राजनीति का अखाड़ा बना मध्य विद्यालय कोईलवा, बीडीओ प्रदीप कुमार चौधरी की पहल पर शांत हुआ मामला

गोह/हसपुरा. हसपुरा प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय कोईलवा इन दिनों शिक्षा का मंदिर कम, राजनीति का अखाड़ा अधिक बन गया है. यहां शिक्षकों के दो गुटों के बीच खींचतान और आरोप-प्रत्यारोप के चलते विद्यालय का शैक्षणिक माहौल पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है. इसी क्रम में गुरुवार को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया जब छात्रों को जानकारी मिली कि विद्यालय के चार शिक्षकों पर विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया है. आक्रोशित छात्रों ने विद्यालय में ताला जड़ दिया और जमकर नारेबाजी की.

छात्रों का आरोप : जो पढ़ाते हैं, उन्हीं पर हुई कार्रवाई

निलंबित शिक्षकों में पुष्पांजलि, बैकुंठ कुमार, शशिकांत कुमार और योगेंद्र प्रसाद शामिल हैं. छात्रा सुधा कुमारी, गीताजलि कुमारी, छाया कुमारी, सोनाली कुमारी सलोनी कुमारी का कहना था कि यही शिक्षक उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देते थे और बिना सही जांच के उन्हें निलंबित कर दिया गया है. उनका आरोप है कि अन्य शिक्षकों द्वारा गुटबाजी कर षड्यंत्र के तहत चारों को फंसाया गया है. छात्रों ने कार्रवाई को वापस लेने की मांग की.

आरोप-प्रत्यारोप का दौर, शिक्षकों में बढ़ी दरार

बताया जाता है कि एक शिक्षक द्वारा मोबाइल चलाने और सोने की शिकायत औरंगाबाद स्थापना शाखा में कुछ तस्वीरों के साथ की गयी थी. शिकायत के आधार पर जांच के बाद चारों शिक्षकों को निलंबित कर दिया गया. वहीं कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि यह शिकायत शिक्षक कुमकुम कुमारी द्वारा की गई थी. हालांकि, उन्होंने स्पष्ट तौर पर इन आरोपों से इन्कार करते हुए इसे बदनाम करने की साजिश करार दिया है.

प्रशासन की पहल से थमा विवाद

सूचना मिलते ही हसपुरा थाना के एसआई पवन कुमार, बीईओ व बीडीओ प्रदीप कुमार चौधरी विद्यालय पहुंचे और छात्रों को समझा-बुझाकर शांत कराया. बीडीओ श्री चौधरी ने बताया कि संबंधित शिक्षकों से समय पर स्पष्टीकरण नहीं मिलने के कारण उन्हें निलंबित किया गया है.

शिक्षकों की सफाई : स्पष्टीकरण देने में नहीं हुई देरी

निलंबित शिक्षकों का कहना है कि वे समय पर स्पष्टीकरण देने पहुंचे थे लेकिन विभागीय कार्यालय में उन्हें बार-बार टाल दिया गया. उन्होंने आरोप लगाया कि बिना उचित जांच के कार्रवाई की गई और जो शिक्षक वास्तव में लापरवाह हैं, वे कार्रवाई से बच गये.

शिक्षा या सियासत

मध्य विद्यालय कोईलवा में जिस तरह से शिक्षक गुटबाजी और आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति में उलझे हैं, उससे सबसे बड़ा नुकसान बच्चों की शिक्षा को हो रहा है. इस मामले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अब गांवों के विद्यालय भी राजनीतिक अखाड़ा बनते जा रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >