Aurangabad news : बारुण में ऑनलाइन सट्टेबाजी का मकड़जाल

Aurangabad news: डिजिटल पेमेंट के जरिए युवाओं को बनाया जा रहा कंगाल

बारुण. आइपीएल और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों के साथ ही बारुण के शहरी और ग्रामीण इलाकों में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी का कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है. औरंगाबाद जिला अंतर्गत बारुण प्रखंड में इन दिनों ऑनलाइन क्रिकेट सट्टेबाजी का एक ऐसा सुनियोजित सिंडिकेट सक्रिय है, जो युवाओं के भविष्य और परिवारों की जमा-पूंजी को दीमक की तरह चाट रहा है. यह खेल महज संयोग नहीं, बल्कि तकनीक की आड़ में की जा रही एक संगठित लूट है, जिसका नेटवर्क पड़ोसी जिले रोहतास तक फैला हुआ है.

11 स्पोर्ट और गो एक्सचेंज जैसी साइटों का खूनी खेल

विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बारुण में 11 स्पोर्ट, एचएन स्पोर्ट, गो एक्सचेंज और बीएसएफ 365 जैसे नामों से कई अवैध साइटें संचालित की जा रही हैं. इन साइटों का पूरा नियंत्रण स्थानीय बुकी और उनके आकाओं के पास होता है. गिरोह के सरगना पहले डिजिटल ऐप्स (फोन पे, गूगल पे आदि) के माध्यम से पैसे मंगवाते हैं और फिर उसके बदले में यूजर को आईडी पर ””””पॉइंट्स”””” या ””””कॉइन”””” देते हैं. इसी आभासी मुद्रा से सट्टेबाजी का खेल शुरू होता है.

तकनीकी धोखाधड़ी : जीतते ही ब्लॉक हो जाती है आइडी

इस धंधे का सबसे काला सच यह है कि इसमें जीतने की गुंजाइश शून्य है. जैसे ही कोई खिलाड़ी दांव जीतने लगता है या उसकी रकम बढ़ने लगती है, पर्दे के पीछे बैठे बुकी सक्रिय हो जाते हैं. वे जानबूझकर साइट में टेक्निकल ग्लिच (तकनीकी खराबी) ला देते हैं या खिलाड़ी की आईडी को ही ब्लॉक कर देते हैं. इस तरह जीतने वाले को भी हार का सामना करना पड़ता है और उसकी जमा पूंजी गिरोह की जेब में चली जाती है.

रोहतास कनेक्शन और गिरोह की कार्यशैली

इस सिंडिकेट का विस्तार इतना बड़ा है कि इसके सटीक दायरे का अंदाजा लगाना मुश्किल है. गिरोह का मुख्य केंद्र रोहतास जिले में है, जहां से बारुण के एजेंटों को निर्देशित किया जाता है. डिजिटल ट्रांजैक्शन और एन्क्रिप्टेड ऐप्स के कारण यह गिरोह अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर है. जहां खेलने वाले कर्ज के दलदल में फंसकर बर्बाद हो रहे हैं, वहीं इस खेल को खिलाने वाले सरगना आलीशान जिंदगी जी रहे हैं.

झांसी में हुआ बड़ा खुलासा, औरंगाबाद पुलिस से भी उम्मीद

उल्लेखनीय है कि महज दो दिन पूर्व उत्तर प्रदेश के झांसी में आईपीएल सट्टेबाजी का एक बड़ा पर्दाफाश हुआ है, जिसमें पुलिस ने करोड़ों के लेनदेन और अंतरराष्ट्रीय तार वाले गिरोह को पकड़ा है. झांसी की इस कार्रवाई के बाद बारुण के स्थानीय निवासियों और बुद्धिजीवियों ने औरंगाबाद पुलिस प्रशासन से मांग की है कि यहां भी विशेष छापेमारी अभियान चलाया जाए ,ताकि युवाओं को इस दलदल से निकाला जा सके.

पुलिस प्रशासन के समक्ष डिजिटल चुनौती और बढ़ती जन-उम्मीदें

इस पूरे काले कारोबार पर पुलिस प्रशासन की कार्यशैली को लेकर भी अब सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने इस डिजिटल सिंडिकेट पर नकेल नहीं कसी, तो क्षेत्र में अपराध का एक नया स्वरूप सामने आ सकता है.

साइबर सेल की भूमिका पर टिकी नजरें

चूंकि यह पूरा खेल 11 स्पोर्ट और गो एक्सचेंज जैसी वेबसाइटों और डिजिटल वॉलेट के माध्यम से खेला जा रहा है, इसलिए औरंगाबाद पुलिस की साइबर सेल पर बड़ी जिम्मेदारी है. जानकारों का कहना है कि इन सट्टेबाजों के बैंक खातों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की ट्रेल (लेनदेन का रिकॉर्ड) खंगालने पर रोहतास और बारुण के कई सफेदपोश चेहरों से नकाब उतर सकता है.

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By AMIT KUMAR SINGH_PT

AMIT KUMAR SINGH_PT is a contributor at Prabhat Khabar.

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