Aurangabad News: (रविकांत पाठक) जिले के देव नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बावजूद यहां के एलपीजी उपभोक्ताओं को अब भी ग्रामीण व्यवस्था के तहत गैस आपूर्ति का सामना करना पड़ रहा है. स्थिति यह है कि जहां लोग शहरी करों का भुगतान कर रहे हैं, वहीं गैस बुकिंग में उन्हें ग्रामीण नियमों के दायरे में रखा गया है, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ रही है.
45 दिन वाली नियमावली बनी परेशानी
नगर पंचायत बनने के बाद भी देव में एलपीजी उपभोक्ताओं को शहरी सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है. नियमों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में 25 दिनों के बाद गैस सिलेंडर की बुकिंग की अनुमति होती है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अवधि 45 दिन निर्धारित है. लेकिन देव के उपभोक्ताओं के लिए अब भी 45 दिन वाला नियम लागू है.
स्थानीय लोगों की शिकायत- 22 से 25 दिन चलता है सिलेंडर
स्थानीय लोगों का कहना है कि एक सिलेंडर लगभग 22 से 25 दिन ही चलता है, जिसके बाद उन्हें 15 से 20 दिनों तक गैस की किल्लत झेलनी पड़ती है. ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम में भी 45 दिन से पहले रिफिल की अनुमति नहीं मिल रही है, जिससे गृहिणियों और छोटे व्यवसायियों को भारी परेशानी हो रही है.
उपभोक्ताओं ने लगाया गंभीर आरोप
उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि वे नगर पंचायत बनने के बाद होल्डिंग टैक्स, प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य नगरीय करों का भुगतान कर रहे हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर अब भी ग्रामीण नियमों में फंसे हुए हैं. उनका कहना है कि टैक्स शहर का लिया जा रहा है, लेकिन सुविधाएं गांव जैसी दी जा रही हैं.
अभी तक गैस वितरण की व्यवस्था नहीं
इस मामले पर प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (एमओ) सीटू सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 में देव को नगर पंचायत का दर्जा मिल चुका है, लेकिन गैस वितरण व्यवस्था अभी भी ग्रामीण नियमों के अनुसार ही चल रही है. उन्होंने कहा कि शहरी नियम लागू करने को लेकर जिला आपूर्ति पदाधिकारी एवं वरीय अधिकारियों को पत्राचार किया गया है. स्थानीय उपभोक्ताओं में इस व्यवस्था को लेकर लगातार असंतोष बढ़ रहा है और वे जल्द शहरी नियम लागू करने की मांग कर रहे हैं.
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