हर रोज होता है लाखों का कारोबार पर सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं

औरंगाबाद सदर : औरंगाबाद शहर के दो बड़े मार्केट में हर रोज लाखों रुपये का कारोबार होता है, पर यहां ग्राहकों की सुविधा का ख्याल बिल्कुल नहीं रखा जाता. शहर के सबसे पुराने मार्केट में प्रसिद्ध पर्षद बाजार और बद्री नारायण मार्केट में बड़े कॉम्प्लेक्स से लेकर विभिन्न तरह की छोटी-छोटी दुकानें भी चलती हैं. […]

औरंगाबाद सदर : औरंगाबाद शहर के दो बड़े मार्केट में हर रोज लाखों रुपये का कारोबार होता है, पर यहां ग्राहकों की सुविधा का ख्याल बिल्कुल नहीं रखा जाता. शहर के सबसे पुराने मार्केट में प्रसिद्ध पर्षद बाजार और बद्री नारायण मार्केट में बड़े कॉम्प्लेक्स से लेकर विभिन्न तरह की छोटी-छोटी दुकानें भी चलती हैं. यहां दो रुपये से लेकर दो लाख रुपये तक के सामान भी बिकते हैं. लेकिन, आवश्यक सुविधा के नाम पर यहां कुछ भी नहीं. न तो इन दोनों मार्केट में सार्वजनिक पेशाबघर है और न ही शौचालय.
यहां पेयजल की भी गंभीर समस्या बनी रहती है. यहां लोगों के चहलकदमी से प्रतिदिन बाजार गुलजार रहता है, पर किसी को ग्राहकों की सुविधा से कोई मतलब नहीं दिखता.अगर किसी को खरीदारी के दौरान जरूरत महसूस हो, तो वे शौचालय व यूरिनल ढूंढते-ढूंढते थक जाते हैं, पर कहीं भी उन्हें यह नहीं मिलता है. पुरुष तो व्यवहार न्यायालय के बाउंड्री के आसपास अपना काम चला लेते है, पर खुले में महिलाओं को काफी दिक्कत होती है.
अब गिरे-तब गिरे की स्थिति में है छत : शहर के इन दोनों मार्केट पर गौर करे, तो इसके छत बूढ़े होकर जंग लगे छड़ों से लटके हुए है. गुजरते समय के साथ-साथ बिल्डिंग की नींव भी हिलने लगी है. तीन -चार महीने पहले पर्षद बाजार के छत पर स्थित भारतीय स्टेट बैंक की रेलिंग टूट कर एक दुकान पर गिर गयी थी, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते टला था. लेकिन, इस घटना से सीख लेने की बजाय जिला पर्षद फिर से भूल कर रही है. दोनों मार्केट काफी पुराने हैं और यहां सुविधाओं के साथ-साथ अब मरम्मत की जरूरत पड़ने लगी है. यहां आनेवाले ग्राहक कहते हैं कि इस मार्केट में कदम रखने से भी डर लगता है. शहर के सबसे पुराने मार्केट में ग्राहकों के लिए कोई सुविधा नहीं है.
सुविधाओं पर उदासीन है जिला पर्षद
शहर के इन दोनों बड़े मार्केट में पेशाबघर और शौचालय के नहीं रहने से ग्राहकों के साथ-साथ दुकानदारों को भी परेशानी होती है, पर दुकानदार इस विषय पर कुछ नहीं कहते. शहर में हाल के दिनों में मॉल व मार्ट का नया कल्चर शुरू हुआ है, जहां ग्राहकों की हर तरह की सुविधा का ध्यान रखा जाता है, पर इससे भी जिला पर्षद सीख नहीं ले रहा. पर्षद बाजार और बद्रीनारायण मार्केट दोनों जिला पर्षद के अंतर्गत आते हैं और इन दोनों मार्केट के अंतर्गत लगभग 200 से अधिक दुकानें हैं. लेकिन, शौचालय और पेशाबघर नदारद है. दुकानदार जिला पर्षद को किराये के रूप में राजस्व भी देते हैं, पर शायद उस पैसे का उपयोग जिला पर्षद कार्यालय चलाने में ही खर्च कर देता है. स्थानीय दुकानदार कहते हैं कि मार्केट पर जिला पर्षद का जरा भी ध्यान नहीं, हमसे सिर्फ किराया वसूला जाता है. यहां सुविधाओं का विकास किया जाना चाहिए.
पर्षद बाजार के क्षतिग्रस्त हिस्सों की हो रही मरम्मत
औरंगाबाद जिला परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि डाॅ संजय यादव बताते हैं कि पर्षद बाजार के कुछ क्षतिग्रस्त जगहों की मरम्मत करायी जा रही है. इसके अलावे मार्केट को रिमॉडलिंग करने की प्लान चल रही है. पेशाबघर व शौचालय के लिए भी सोचा जा रहा है. दुकानदार समय पर किराया नहीं देते, जिसके कारण बहुत कुछ नहीं हो पा रहा. समय के साथ-साथ मार्केट की सूरत बदलने का प्रयास किया जायेगा.जिला पर्षद इस दिशा में अपने स्तर से प्रयास करेगा.

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