औरंगाबाद सदर : सदर अस्पताल की व्यवस्था में सुधार होता नहीं दिख रहा है. इस कड़ाके की ठंड में जहां एक स्वस्थ इंसान भी थर-थर कंपकंपा रहा है. वहीं, सदर अस्पताल के महिला वार्ड में मरीजों को ठंड की रात में फर्श पर सोना पड़ रहा है. दूसरी तरफ सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में कुत्ते बेड पर आराम फरमाते हैं. सदर अस्पताल की ये ऐसी तसवीर है, जिसे देख कर कोई भी यह सकता है कि सचमुच सदर अस्पताल में व्यवस्था नाम की कोई चीज ही नहीं.
कंबल के अभाव में मरीज रात भर कांपते हैं, तो अस्पताल की ड्यूटी में लगे कर्मी रातभर चैन की नींद लेते हैं. मरीज वार्डों की खिड़कियां खुली रहती हैं और पछुआ हवा मरीजों को रातभर बेचैन करते रहती है. ऐसी व्यवस्था पर न तो सदर अस्पताल के जिम्मेवार पदाधिकारी ही कोई एक्शन लेते हैं और न ही जिला प्रशासन. जो मरीज अपने साथ फर्श पर बिछाने की व्यवस्था और ओढ़ने के लिए कंबल लेकर चलते हैं, उसे ही सदर अस्पताल में इलाज के दौरान थोड़ी राहत मिलती है.
यहां बता दें कि चार दिन पूर्व अनुमंडल पदाधिकारी सुरेंद्र प्रसाद ने सदर अस्पताल का निरीक्षण किया था, उस वक्त मरीजों ने एसडीओ से स्पष्ट कहा था कि न तो हमलोगों को चादर दी जाती है और न कंबल. बेड का भी अभाव है. अस्पताल उपाधीक्षक और अस्पताल प्रबंधक को इस मसले पर फटकार भी लगी थी. अस्पताल उपाधीक्षक ने बताया कि मरीजों के िलए अस्पताल में हर सुविधा उपलब्ध है. कभी-कभार मरीजों के परिजन जबरदस्ती फर्श पर सो जाते हैं.
