एक जीप से 73 गांवों की सुरक्षा की जिम्मेवारी हसपुरा (औरंगाबाद). हसपुरा थाना संसाधनों की कमी को झेल रहा है. कम संसाधनों में प्रखंड के 73 गांवों की सुरक्षा का दावा किया जाता है. 73 गांवों में गश्ती के लिए एक जीप है. एक साथ दो गांवों में कोई घटना होने पर पुलिस दोनों गांवों में नहीं पहुंच पाती है. लोगों के सहयोग से पुलिस को रहने के लिए बैरक बनाया गया है. सरकारी स्तर पर बनाये जा रहे बैरक अधूरा पड़ा है. त्योहार में बाहर से जब पुलिसकर्मी आते हैं तो उन्हें ठहरने में परेशानी होती है. पुलिसकर्मी बताते हैं कि लोगों के सहयोग से बनाये गये बैरक में ढलाई नहीं है. इससे गरमी व ठंड के दिनों में परेशानी होती है. सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि फोर्स के लिये रसोईघर की व्यवस्था नहीं है. खुले में भोजन बनाना पड़ता है. यहां थानाध्यक्ष समेत चार एसआइ, दो दर्जन चौकीदार, दफादार, मुंशी व दर्जनों सिपाही कार्यरत हैं. कई चौकीदारों की सेवानिवृत्ति के बाद अब तक पद खाली है. पुरुष व महिलाओं के लिए अलग-अलग कैदखाना बना है.
एक जीप से 73 गांवों की सुरक्षा की जम्मिेवारी
एक जीप से 73 गांवों की सुरक्षा की जिम्मेवारी हसपुरा (औरंगाबाद). हसपुरा थाना संसाधनों की कमी को झेल रहा है. कम संसाधनों में प्रखंड के 73 गांवों की सुरक्षा का दावा किया जाता है. 73 गांवों में गश्ती के लिए एक जीप है. एक साथ दो गांवों में कोई घटना होने पर पुलिस दोनों गांवों […]
