बहन के टूटते रश्तिे को बचाने के लिए नक्सली बना था जयंत

बहन के टूटते रिश्ते को बचाने के लिए नक्सली बना था जयंत बांध गोरया जंगल में मारे गये जोनल कमांडर जयंत यादव के शव की पहचान उसके भाई ने की (फोटो नंबर-20)कैप्शन- शव लेने के लिये पहुंचा नक्सली जोनल कमांडर के भाई कमलेश यादव व अन्य औरंगाबाद (नगर)पिछले शुक्रवार की देर शाम देव प्रखंड के […]

बहन के टूटते रिश्ते को बचाने के लिए नक्सली बना था जयंत बांध गोरया जंगल में मारे गये जोनल कमांडर जयंत यादव के शव की पहचान उसके भाई ने की (फोटो नंबर-20)कैप्शन- शव लेने के लिये पहुंचा नक्सली जोनल कमांडर के भाई कमलेश यादव व अन्य औरंगाबाद (नगर)पिछले शुक्रवार की देर शाम देव प्रखंड के ढिबरा थाना अंतर्गत बांध गोरया जंगल में पुलिस व नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड़ में मारे गये चार में तीन नक्सलियों की पहचान परिजनों द्वारा रविवार को पोस्टमार्टम कराने के दौरान सदर अस्पताल में कर ली. इनमें जोनल कमांडर जयंत यादव उर्फ रत्न यादव की पहचान उसके सहोदर भाई कमलेश यादव निवासी राजपुर थाना प्रतापपुर, जिला चतरा झारखंड ने की है. मृतक नक्सली जयंत के छोटे भाई कमलेश यादव ने बताया कि मुठभेड़ की घटना की सूचना मिलते ही अपने परिजनों व रिश्तेदारों के साथ रविवार को औरंगाबाद पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे. इस दौरान कमलेश ने कहा कि मुठभेड़ के दौरान मेरे बड़े भाई जयंत यादव मारे गये हैं. हालांकि उन्होंने कोई गुनाह नहीं किया था. पोस्टमार्टम हाउस के समीप जयंत के नक्सली संगठन में जुड़ने के मसले पर कमलेश ने नम आंखों के साथ कहा कि पांच भाई व तीन बहन हैं. जयंत भाइयों मे सबसे बड़े थे. सबसे बड़ी बहन की शादी चतरा जिले के ही प्रतापपुर थाना के ही लौंगतरी गांव में हुई थी. शादी के कुछ ही दिनों बाद ससुरालवालों ने किसी बात को लेकर बहन को छोड़ने की बात कह रहे थे. साथ ही गांव में सरकार द्वारा तालाब की खुदाई करायी जा रही थी, जिसका निर्माण मेरे भाई जयंत कराना चाहते थे, लेकिन ग्रामीणों के विरोध से काम नहीं मिला. यही दोनों घटनाओं के बाद जयंत ने आठवीं कक्षा में पढ़ाई करने के दौरान ही अपने किताबों को छोड़ दिया और वह सभी प्रतिशोध का ज्वाला लिए नक्सली संगठन से जुड़ गये. कई बार हमलोगों ने उन्हें मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया था. बावजूद वे संगठन से जुड़े रहे. कमलेश ने यह भी बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से संगठन से जुड़े हुए थे इसी दौरान उनकी शादी भी हुई थी. उनका दो पुत्र है. इनमें छह वर्ष का हैप्पी व चार वर्ष का कैप्पी है. कमलेश ने यह भी बताया कि हमलोग पांच भाई हैं जो अपने पिता रघुनी यादव के साथ गांव में ही खेती करते हैं. मारे गये नक्सली जयंत के भाई रमेश, कमलेश, कुलेश्वर, आदित्य गांव में शिक्षा ग्रहण कर अपने परिवार को भरण पोषण करते आ रहे हैं. कमलेश ने यह भी बताया कि जयंत बचपन में शांत स्वभाव के व्यक्ति थे. कैसे रास्ता भटक गये यह किसी को पता नहीं चला सका. आज यही कारण है कि अपने बड़े भाई का शव लेने के लिए यहां आना पड़ा.

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