1973 में नक्सलियों ने पसारा था अपना पांव

1973 में नक्सलियों ने पसारा था अपना पांवलगातार नक्सलियों के निशाने पर रहा है जिला औरंगाबाद (नगर) औरंगाबाद जिले में नक्सलियों ने अपने पांव आज से 43 साल पहले पसारा था. वर्ष 1973 में मुखिया रणधीर सिंह को कासमा बाजार में हत्या कर नक्सलियों ने अपना संगठन को आगाज किया था. इसके बाद एक-एक कर […]

1973 में नक्सलियों ने पसारा था अपना पांवलगातार नक्सलियों के निशाने पर रहा है जिला औरंगाबाद (नगर) औरंगाबाद जिले में नक्सलियों ने अपने पांव आज से 43 साल पहले पसारा था. वर्ष 1973 में मुखिया रणधीर सिंह को कासमा बाजार में हत्या कर नक्सलियों ने अपना संगठन को आगाज किया था. इसके बाद एक-एक कर लगातार घटना का अंजाम देने में नक्सली सफल हो रहे थे. रफीगंज प्रखंड के कासमा में मुखिया की हत्या करने के बाद मुफस्सिल थाना के परसडीह गांव में दो लोगों की हत्याएं की थी. इसके बाद नक्सली रफीगंज थाना क्षेत्र के दरमिया गांव में एक ही परिवार के छह लोगों की हत्या की थी. इसके बाद मदनपुर थाना क्षेत्र के छेछानी गांव में छह लोगों की हत्या कर पीकेट को उड़ा दिया था. इन घटनाओं के बाद पुलिस नक्सलियों पर लगाम लगाने की कोशिश कर रही थी कि 26,27 मई 1987 की रात मदनपुर थाना क्षेत्र के ही दलेलचक बघौरा गांव में हमला कर दूधमुंहे बच्चों के साथ 54 लोगों की निर्मम हत्या कर दी थी. इस घटना के बाद सरकार ने नक्सलियों के विरुद्ध लड़ने की रणनीति बनायी. उस समय से पुलिस प्रशासन की हाथ मजबूत रही और नक्सलियों पर काबू भी पाया गया. लेकिन नक्सलियों ने अपनी हार न मानते हुए वर्ष 1997 में गोह थाना क्षेत्र के भृगरारि मेला में हमला बोल कर छह बीएमपी जवानों दिनदहाड़े हत्या कर दी थी और जवानों के पास रहे हथियारों को लूट लिया था. यह काफी दिनों तक सूर्खियों रहा. वर्ष 2003 में माली व सिमरा थाना पर हमला बोलकर थाना भवन को ध्वस्त कर कई पुलिस जवानों के पास से हथियार लूट लिया था. वर्ष 2013 की जुलाई में गोह प्रखंड के एमवीएल कंपनी के बेस कैंप पर हमला बोलकर चार सैफ जवानों सहित छह लोगों की हत्या कर 30 आधुनिक हथियार, हजारों कारतूस लूट लिये थे, साथ ही दर्जनों वाहनों को जला दिया था. कुछ ही माह बाद खुदवां थाना क्षेत्र के पिसाय गांव जानेवाली सड़क में लैंडमाइंस लगाकर नक्सलियों ने जिला पार्षद पति सुशील पांडेय सहित सात लोगों को मौत के घाट उतार दिया था. इस घटना के बाद तत्कालीन एसपी दलजीत सिंह को सरकार ने हटाते हुये उपेंद्र शर्मा को जिले का एसपी बनाया था, यही नहीं उपेंद्र शर्मा को हेलीकॉप्टर से जिला में भेजा था. एसपी उपेंद्र शर्मा ने नक्सलियों पर लगाम लगाने की कोशिश कर ही रहे थे कि तीन दिसंबर 2013 को दिन में नक्सलियों ने नवीनगर-टंडवा पथ में लैंडमाइंस लगाकर टंडवा थाने की पुलिस जीप को उड़ा दिया था. जीप पर सवार टंडवा थानाध्यक्ष अजय कुमार सहित सात लोग इसमें मारे गये थे. दिसंबर में घटना का अंजाम देने के बाद नक्सली कुछ समय के लिए शांत रहे. 2014 में लोकसभा चुनाव परवान पर चढा तो नक्सलियों ने देव-बालूगंज पथ में बनुआ मोड़ के समीप सड़क मे लैंडमाइंस लगाया. जब सूचना पाकर भलुआही सीआरपीएफ कैंप के डिप्टी कमांडेट इंद्रजीत कुमार, ढिबरा थानाध्यक्ष अमर चौधरी के नेतृत्व में बम को निष्क्रीय करने के लिए पहुंचे तो लैंडमाइंस विस्फोट हो गया था. इस घटना में डिप्टी कमांडेट सहित तीन जवानों की मौत घटनास्थल पर हो गयी थी, जबकि थानाध्यक्ष अमर चौधरी सहित सात लोग गंभीर रूप से जख्मी हुए थे.

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