औरंगाबाद : देश के सबसे लंबे, ऐतिहासिक व उपयोगी सड़क मार्गों में से एक, जीटी रोड मदनपुर इलाके से जिले में प्रवेश कर और सोन पर डेहरी के पास बने पुल के करीब बारुण प्रखंड की सीमा तक औरंगाबाद जिले में फैला है. औरंगाबाद शहर के गुजरते हुए यह नगर प्रखंड के आेरा गांव को छूते हुए दोनों तरफ आगे बढ़ता है. पर, ओरा गांव तो मानो इस सड़क की खूनी प्यास का अभिशप्त है. आये दिन जीटी रोड की खून की प्यास इस गांव के लोगों के रक्त से बुझती है. अब तक असंख्य हादसे हो चुके हैं. बार-बार गांव वालों की जान जाती है. 2015 में ही इस गांव के 25 लोगों की जिंदगी जीटी रोड की भेंट चढ़ चुकी है.
और इन सबके पीछे मूल वजह इस सड़क पर एक अंडरपास और ओरा के गरीब ग्रामीणों के घर शौचालय की कमी बतायी जाती है. जानकारी के मुताबिक, पिछले तीन वर्षों में यहां के 40 लोग जीटी रोड पर हुए हादसों में अपनी जान से हाथ धो चुके हैं. एक परिवार के तीन-तीन लोगों की मौत हो चुकी है. उसी घर के दो अन्य लोग भी हादसों की चपेट में आकर विकलांग हो गये और अब जैसे-तैसे जिंदगी का भार उठा रहे हैं.
गांववालों का कहना है कि काम रहता है, तो बार-बार जीटी रोड के आर-पार आना-जाना पड़ता है. चूंकि यहां फुटब्रिज या अंडरपास नहीं है, इसलिए लोगों को सीधे रोड पार करना होता है और इसी दौरान कई बार तेज रफ्तार दौड़ते वाहनों की चपेट में लोग जब आ जाते हैं, तो बमुश्किल ही अगले दिन का सूरज देख पाते हैं. जो सड़क हादसों में घायल होकर बचे, उनकी विकलांगता ने उनकी शेष बची जिंदगी को बोझ बना रखा है. करीब 5000 की आबादी वाले इस गांव में ढेर सारे ऐसे गरीब-गुरबा भी जिंदगी जी रहे हैं, जिनके घरों में शौचालय नहीं है.
उन्हें शौच के लिए सड़क के इधर-उधर खाली जगहों या खेतों में जाना होता है. इस दौरान भी कम हादसे नहीं होते. पर, प्रशासन है कि इस स्थिति का नोटिस नहीं लेता और गांववालों की जिंदगी रोज दावं पर लगी रहती है. वैसे, हाल में जन सुरक्षा संघर्ष समिति के लोगों ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन देकर अंडरपास या फुटओवरब्रिज बनवाने की मांग रखी है. इस बीच, एनएचएआइ के अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण भी किया है, पर काम सरकारी है इसलिए किसी को पता नहीं कि कब तक इस मोरचे पर बात आगे बढ़ सकेगी. हालांकि, गांववाले अब दूसरे रास्ते भी अख्तियार करने की बात करने लगे हैं.
इनका कहना है कि अगर बात से बात नहीं बनती है, तो फिर आंदोलन का रास्ता पकड़ा जायेगा. जीटी रोड की सिक्स लेनिंग का काम बंद कराना पड़ेगा. सड़क पर तैयारी के साथ उतरना होगा. वैसे, ये लोग अपनी मांगों पर विचार के इंतजार में जनवरी महीना बिताने को तैयार हैं.
ओरा गांव के गरीब परिवारों के करीब 300 घर ऐसे हैं, जहां शौचालय नहीं है. इनकी आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं है कि ये अपने बूते शौचालय बनवा सकें. स्थानीय मुखिया अनिल कुमार के अनुसार, शौचालय के लिए करीब पौने पांच लाख की रकम मिली थी, पर वह आनंदपुरा, अजरकबे हसौली व यारी आदि गांवों में ही खप गयी. इतने पैसे से आखिर कितना काम होगा ? वह कहते हैं कि शौचालय नहीं होने पर लोग घरों से बाहर तो जायेंगे ही. जब बाहर निकलते हैं, तो जल्दबाजी या असावधानी के चलते हादसे होते हैं और इनकी जान भी जाती है.
