औरंगाबाद (नगर) : शहर के टाउन इंटर कॉलेज संसाधन के अभाव में आज कई समस्याओं से जूझ रहा है. यहां न तो छात्रों की संख्या के मुताबिक भवन है और न ही कर्मचारी. छात्र-छात्राओं को किसी तरह पठन पाठन कराया जा रहा है. कुछ छात्र भी विद्यालय आने में रुचि नहीं रखते हैं.
इस विद्यालय की स्थापना 1938 में ही हुआ था, लेकिन दिन प्रतिदिन यहां छात्रों की संख्या बढ़ती गयी, पर उसके मुताबिक संसाधन नहीं बढ़ाये गये. इससे फिलहाल स्थिति काफी खराब है. हालांकि, कुछ साल पहले भवन का निर्माण कराया गया था, इसके बावजूद भी भवन की कमी दूर नहीं हो सकी. भवन की कमी होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी इंटर के छात्र-छात्राओं को होती है. वहीं, पुस्तकालय के लिए कोई अलग भवन नहीं है.
प्रभारी पुस्तकालयाध्यक्ष ने बताया कि भवन कमी होने के कारण पुस्तकों का रखरखाव सही ढंग से नहीं हो पाता है. स्टाफ रूम की भी व्यवस्था नहीं है. वैसे तो इस विद्यालय में इंटर तक के छात्रों के लिए किताबें उपलब्ध हैं, लेकिन छात्र ही पुस्तक निर्गत कराने में रुचि नहीं रखते हैं. उन्होंने बताया कि पुस्तकालय कक्ष में छात्रों के किताबों के अलावे हिंदी उपान्यास, कविता, निबंध आदि की पुस्तकें भी उपलब्ध हैं.
77 साल से चल रहा विद्यालय : कॉलेज के प्राचार्य मीरा रानी ने बताया कि 77 साल पहले 1938 में विद्यालय की स्थापना की गयी थी. उस समय 10वीं तक पढ़ाई होती थी. वर्ष 1985 में इस विद्यालय को इंटर का दर्जा दिया गया.
पहले छात्रों की संख्या कम थी, जिससे पठन-पाठन करने में कोई परेशानी नहीं होती थी. आज छात्रों की संख्या में इजाफा हो रहा है और भवन पहले ही इतना है, जिससे छात्रों को पढ़ाई करने में परेशानी हो रही है. प्राचार्य ने बताया कि 20 साल पहले घ्वस्त भवनों के बाद नये भवन का निर्माण नहीं कराये जाने से शिक्षण कार्य में परेशानी हो रही है. अभी 10 कमरों के बदौलत ढ़ाई हजार छात्र-छात्राओं का पठन-पाठन होता है.
उन्होंने बताया कि इंटर में छात्र-छात्राएं दोनों हैं. पुराने भवन टूट-टूट कर गिर रहे हैं. कई बार विभाग को मलबे हटाने व नये भवन बनाने के लिए आवेदन लिखा गया, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी है. यहां भवन के साथ-साथ चहारदीवारी की भी व्यवस्था समुचित ढंग से नहीं है.
