भृगुरारी में आज जुटेगी श्रद्धालुओं की भीड़ पुनपुन-मदार नदियों के संगम पर कार्तिक माह में लगता है मेलाहाथ से बनाये गये भेड़ के ऊन से बनाये गये कंबल हैं मेले की पहचान प्रतिनिधि, हसपुरा (औरंगाबाद) गोह प्रखंड क्षेत्र के भृगुरारी स्थित पुनपुन-मदार नदियों के संगम में हजारों श्रद्धालु बुधवार को डुबकी लगायेंगे और भृगुमुनी व नकटी भवानी के पूजा-अर्चना करेंगे.गौरतलब है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन भृगुरारी स्थित पुनपुन-मदार के संगम में स्नान करने व बहती धारा में दीपदान का काफी महत्व है. एक पखवारे तक चलनेवाले भृगुरारी मेले में दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं और संगम में स्नान कर गुफा में स्थित नकटी भवानी के दर्शन करते हैं व मेले का आनंद लेते हैं. भृगुमुनी मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है़ कार्तिक माह में लगनेवाले मेले का खास महत्व है. प्रसाद स्वरूप सुथनी व सिंघाड़ा खाने की परंपरा है. यहां हाथ द्वारा बनाये गये भेड़ के ऊन के कंबल की खूब बिक्री होती है. यह कंबल इस मेले की विशेष पहचान है. पौराणिक कथा में वर्णन है कि पुनपुन-मदार नदियों के संगम भृगुरारी में ब्रह्मा के मानस पुत्र भृगु ऋषि का आश्रम था. उनके आश्रम का आज भी प्रमाण है. यहां एक बड़ी गुफा है उसी गुफा के ऊपर मंदिर बना है. यहीं भृगु ऋषि ने ग्रंथ मनु स्मृति की रचना की थी, जो आज भृगु संहिता के नाम से प्रसिद्ध है.
भृगुरारी में आज जुटेगी श्रद्धालुओं की भीड़
भृगुरारी में आज जुटेगी श्रद्धालुओं की भीड़ पुनपुन-मदार नदियों के संगम पर कार्तिक माह में लगता है मेलाहाथ से बनाये गये भेड़ के ऊन से बनाये गये कंबल हैं मेले की पहचान प्रतिनिधि, हसपुरा (औरंगाबाद) गोह प्रखंड क्षेत्र के भृगुरारी स्थित पुनपुन-मदार नदियों के संगम में हजारों श्रद्धालु बुधवार को डुबकी लगायेंगे और भृगुमुनी व […]
