खुलासा. गलत तरीके से बहाल होकर औरंगाबाद में कर रहा था नौकरी

खुलासा. गलत तरीके से बहाल होकर औरंगाबाद में कर रहा था नौकरी तीन फर्जी सिपाही पकड़ाये सिपाही बहाली की लिखित परीक्षा में पकड़ाये जवानों के बदले दूसरे लोगों ने दी थी परीक्षाजांच में धराये वैशाली का धीरेंद्र कुमार, मुंगेर का मिथून कुमार व बांका का ऋषभ राज ने खोले कई राज (फोटो नंबर-5)कैप्शन- पकड़े गये […]

खुलासा. गलत तरीके से बहाल होकर औरंगाबाद में कर रहा था नौकरी तीन फर्जी सिपाही पकड़ाये सिपाही बहाली की लिखित परीक्षा में पकड़ाये जवानों के बदले दूसरे लोगों ने दी थी परीक्षाजांच में धराये वैशाली का धीरेंद्र कुमार, मुंगेर का मिथून कुमार व बांका का ऋषभ राज ने खोले कई राज (फोटो नंबर-5)कैप्शन- पकड़े गये फर्जी सिपाही (पेज तीन की लीड) औरंगाबाद (ग्रामीण)गलत काम एक-एक दिन जरूर पकड़ा जाता है. ऐसे ही फर्जी तरीके से नौकरी पाने की तीन युवकों की लालसा तो पूरी हो गयी. इसके बाद तीन माह तक औरंगाबाद पुलिस केंद्र में सिपाही की नौकरी की भी. चुनाव से लेकर छठ पर्व में अपनी उपस्थिति भी दर्ज करायी. लेकिन यह उपस्थिति इनकी आखिरी उपस्थिति बन कर रह गयी. फर्जीवाड़ा का भंडाफोड़ हो गया. नौकरी तो गयी ही जेल की नौबत आ गयी. यह मामला औरंगाबाद के पुलिस केंद्र से जुड़ा है. औरंगाबाद में ही ड्यूटी पर तैनात पुलिस के तीन जवानों को फर्जीवाड़े में पकड़ा गया. फर्जी जवान धीरेंद्र कुमार, मिथून कुमार व ऋषभ राज को पूछताछ के लिए नगर थाना ले जाया गया. रविवार को पूरे दिन तीनों से पूछताछ की गयी. इसमें सभी ने कई खुलासे किये हैं. मामला यह है कि वैशाली जिले के काला पहाड़ निवासी धीरेंद्र कुमार, मुंगेर जिले के कंतपुर गांव के मिथून कुमार व बांका जिले के रत्ता गांव के ऋषभ राज की जगह पर सिपाही बहाली की लिखित परीक्षा में दूसरे लोगों ने परीक्षा दी थी. इस मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब गांव के ही लोगों ने इसकी शिकायत केंद्रीय चयन आयोग से की. इसके बाद मामले की जांच प्रारंभ हो गयी. जांच की कार्रवाई पूरी होने के बाद पुलिस अधीक्षक बाबू राम ने पुलिस केंद्र के तीनों सिपाहियों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया. गिरफ्तार जवानों ने बताया कि 19 अक्तूबर 2014 को सिपाही भरती की लिखित परीक्षा होम सेंटर पर लिया गया था. इस संबंध में पुलिस अधीक्षक बाबू राम ने बताया कि तीनों जवानों के विरूद्ध फर्जीवाड़ा का मामला दर्ज कर जेल भेजे जाने की कार्रवाई की जा गयी है.तीन लाख रुपये में धीरेंद्र ने की थी सेटिंग फर्जी रूप से बहाल जवानों से पूछताछ के दौरान कई खुलासे हुए हैं. काला पहाड़ निवासी धीरेंद्र कुमार को हाजीपुर शहर केे ही विकास कुमार नामक व्यक्ति ने तीन लाख रुपये में सिपाही की नौकरी दिलाने की बात कही थी. विकास ने ही धीरेंद्र की जगह दूसरे को परीक्षा देने की व्यवस्था भी की थी. एडवांस के रूप में 50 हजार रुपये का भुगतान प्राप्त किया था. विकास हाजीपुर में ही कोचिंग चलता है. मुंगेर के कंतपुर गांव के मिथून कुमार को परीक्षा में पास कराने की जिम्मेवारी मुंगेर के ही अजय कुमार सिंह ने ली थी. इससे एवज में 50 हजार रुपये पर बात बनी थी. 25 हजार रुपये एडवांस के तौर पर अजय ने लिया था. इसी तरह बांका रत्ता गांव के ऋषभ राज को भी 25 हजार रुपये में परीक्षा पास कराने की जिम्मेवारी सौरभ कुमार नामक सेंटर ने ली थी. इन फर्जी सिपाहियों द्वारा लिए गये सेटर के नाम से सिपाही भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा का मामला उजागर हुआ है. पता चला है कि पूरे राज्य में दो हजार से ऊपर मामले सिपाही भर्ती में पकड़े गये हैं. एक माह पहले भी पुलिस केंद्र के ही दो जवानों को फर्जी बहाली में ही पकड़ा गया था और उन्हें जेल भेजा गया था.

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