औरंगाबाद (सदर) : एक तरफ शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षा की बेहतरी के लिए करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं. छात्र-छात्राओं के लिए कई तरह की योजनाएं भी चलायी जा रही है, तो दूसरी तरफ ऐसे कई विद्यालय व कॉलेज हैं जहां संसाधनों के साथ-साथ कई तरह की समस्याएं हैं. कहीं भवन तो कहीं शिक्षकों की घोर कमी है, जिससे छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटक रहा है.
शहर के रामलखन सिंह यादव कॉलेज में न तो छात्र-छात्राओं की संख्या के मुताबिक विषयवार शिक्षक हैं और न ही पर्याप्त मात्रा में भवन. शिक्षकों की कमी हमेशा छात्र-छात्राओं को खलती है. छात्र-छात्राओं को तो किसी तरह इंटर, स्नातक सहित अन्य कोर्सों का सर्टिफिकेट मिल जाता है, लेकिन ज्ञान नहीं मिल पाता है. शिक्षकों की कमी से छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बिल्कुल बाधित हैं. कॉलेज में कभी-कभार पढ़ाई होती भी है तो कुछ ही विषयों की. पढ़ाई नहीं होने से छात्र-छात्राओं को तब परेशानी से गुजरना पड़ता है जब वे कंपीटीशन में शामिल होने जाते हैं. शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल रही है.
रामलखन सिंह यादव कॉलेज को जिस उद्देश्य के साथ डिग्री कॉलेज का दर्जा दिया गया था वह पूरी नहीं हो रही है. आज स्थिति यह है कि प्राइमरी स्कूल से भी स्थिति बदतर हो गयी है. यहां न तो विषयवार शिक्षक हैं और न ही किसी अन्य तरह की सुविधाएं. इससे विद्यार्थी व अभिभावक दोनों परेशान हैं.
