सात साल से हजारों अंधेरे में

औरंगाबाद (ग्रामीण): औरंगाबाद शहर से सटे तेंदुआ पोखर व तेंदुआदान गांव की लगभग तीन हजार आबादी पिछले सात वर्षो से अंधेरे में जीवन बसर कर रही है. इस दौरान विधानसभा, लोकसभा व पंचायत चुनाव भी कराया गया. ग्रामीणों ने मतदान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. वह इसलिए की बेहतर सरकार व बेहतर जनप्रतिनिधि का चुनाव […]

औरंगाबाद (ग्रामीण): औरंगाबाद शहर से सटे तेंदुआ पोखर व तेंदुआदान गांव की लगभग तीन हजार आबादी पिछले सात वर्षो से अंधेरे में जीवन बसर कर रही है. इस दौरान विधानसभा, लोकसभा व पंचायत चुनाव भी कराया गया. ग्रामीणों ने मतदान में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया. वह इसलिए की बेहतर सरकार व बेहतर जनप्रतिनिधि का चुनाव हो, ताकि गांव के साथ-साथ आम अवाम का भी विकास हो.

लेकिन ग्रामीणों को अपने सपने तब बिखर गये जब गांव में रोशनी के लिए लगे ट्रांसफॉर्मर को जलने के बाद भी नहीं बदला गया. सात वर्ष पूर्व राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत पोखर से सटे 25 केवीए का ट्रांसफॉर्मर लगाया गया था, लेकिन एक सप्ताह में ही वह ट्रांसफॉर्मर जल गया. ग्रामीणों ने बिजली का उपयोग भी ठीक से नहीं किया था. सवाल यह उठता है कि सरकार गांव-गांव का विकास करने के लिए रुपये पानी की तरह बहा रही है.

योजनाओं का लगातार क्रियान्वयन हो रहा है, लेकिन जिला मुख्यालय से सटे इस गांव की बदहाली देखने से प्रतीत होती है कि आखिर यहां विकास क्यों नहीं हुआ. आखिर ग्रामीण सिर्फ वोट देने के लिए बने है,यह बड़ा सवाल है. जनप्रतिनिधियों ने भी इनकी एक न सुनी. ग्रामीणों की मानें तो स्थानीय विधायक ने उन्हें ट्रांसफॉर्मर के लिए दिलासा दिया था. लेकिन ट्रांसफॉर्मर नहीं लगाया गया.

कुछ ग्रामीणों की माने तो एक जाति विशेष होने के चलते भी उनके गांव को उपेक्षित किया जा रहा है. मंगलवार को दर्जनों ग्रामीणों ने ट्रांसफॉर्मर के समीप ही अपने आक्रोश का जम कर इजहार किया. ग्रामीण बैजनाथ यादव, राजेंद्र ठाकुर, विनोद राम, तपेश्वर यादव, संजय यादव, कमलेश यादव, सदन मिस्त्री,पप्पू कुमार, वार्ड पार्षद बैजनाथ राम ने कहा कि ट्रांसफॉर्मर के लिए जनप्रतिनिधियों से लेकर बिजली विभाग के कार्यालय तक कई बार चक्कर लगाये. लिखित से लेकर मौखिक गुहार लगायी. लेकिन किसी ने सुध नहीं ली. गांव की गलियों की हालत बद से बदतर है. नालियां बजबजा रही है. गांव से होकर गुजरी सड़क भी टूटी फूटी है. ऐसे में सरकार का बेहतर विकास का दावा लोगों के गले नहीं उतर पा रहा है.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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