औरंगाबाद (कोर्ट) : सदर प्रखंड की जम्होर पंचायत के मोर डिहरी निवासी रूबी कुंवर के पति की मौत गंभीर बीमारी से हो गयी थी. इसके बाद उसके भसुर व ससुराल वालों द्वारा प्रताड़ित किया जाने लगा और घर से निकालने का प्रयास किया जाने लगा. यहां तक कि जीवन यापन के लिए पैसे आदि भी देने बंद कर दिये गये.
पहले तो उसने अपने ससुराल वालों से मिन्नतें की, लेकिन उन लोगों के व्यवहार में कोई सुधार नहीं हुआ. अंत में तंग होकर महिला रूबी कुंवर महिला हेल्प लाइन पहुंची. हेल्प लाइन ने मामले को गंभीरता से लिया. इसके बाद उसे न्याय मिली. फिलहाल, महिला को भरण-पोषण ससुराल वालों द्वारा दिया जा रहा है. वह अपने दो बच्चों के साथ खुशी-खुशी जीवन यापन कर रही है. यह सिर्फ एक महिला की दास्तां नहीं हैं, बल्कि पूरे जिले में दर्जनों ऐसी महिलाएं हैं, जिन्हें महिला हेल्प लाइन की पहल पर न्याय मिली है.
सरकार द्वारा प्रत्येक जिलों में महिला उत्पीड़न के मामलों के निबटारे व पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के उद्देश्य से महिला हेल्प लाइन की स्थापना की गयी है. इसके माध्यम से घरेलू हिंसा की शिकार महिलाओं व पारिवारिक विवादों में टूटते परिवारों को बचाया जा रहा है. बारुण प्रखंड के सिरिस गांव की महिला राजपति देवी भी घरेलू हिंसा की शिकार थी. इसके पति लक्ष्मी नारायण पांडेय ने उसे घर से निकाल दिया था और खुद वाराणसी के चंदौली में रहने लगा था. इस महिला का उजड़ता घर भी महिला हेल्प लाइन के प्रयास से बच गया. इसी तरह कुटुंबा प्रखंड के देउरा गांव की रहने वाली देवंती देवी को उसके पति नागदेव मेहता ने छोड़ दिया था. महिला हेल्प लाइन ने इसमें मुख्य भूमिका निभाते हुए फिर से दोनों को एक करा दिया.
