दाउदनगर (अनुमंडल) : सरकार द्वारा सरकारी विद्यालयों की स्थिति में सुधार के चाहे जितने दावे हो या फिर जितने भी प्रयास हो, लेकिन उन दावों व प्रयासों की हकीकत शहर के पटना फाटक स्थित मध्य विद्यालय की स्थिति देख कर समझा जा सकता है.
इस विद्यालय परिसर से गुजर रहा 11 हजार वोल्ट का हाइ टेंशन तार कभी भी हादसे का सबब बन सकता है. स्थिति इतनी दयनीय है कि यहां नामांकित 438 बच्चों में औसतन 300 बच्चे ही प्राय: प्रतिदिन विद्यालय पहुंचते है, जिनके बैठने के लिए भी पर्याप्त कमरे नहीं है.
मात्र दो कमरे में पहली से आठवीं तक का वर्ग संचालन सात शिक्षकों द्वारा किया जाता है. इससे समझा जा सकता है कि कितनी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा छात्र-छात्राओं को मिल पाती होगी. दो पुराने कमरे पूरी तरह जजर्र स्थिति में है. उसके दरवाजे ईंट से इस डर से बंद कर दिये गये हैं कि कहीं कोई इन कमरों में बच्च न घुस जाये. विद्यालय का कार्यालय किचेन शेड में चलता है.
वार्ड संख्या-21 में यह विद्यालय अवस्थित है. प्रभारी प्रधानाध्यापिका सोना कुमारी का कहना है कि वर्ष 2012 में भवन निर्माण की राशि हाइ टेंशन तार गुजरने के कारण ही विभाग को वापस लौटा दी गयी. बिजली विभाग के पदाधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराये जाने के बावजूद तार को नहीं हटाया गया. विद्यालय की चहारदीवारी भी टूट गयी है.
मात्र दो कमरे में आठ कक्षाओं का संचालन करने में परेशानी होना स्वाभाविक है. इस वार्ड केवार्ड पार्षद सह नगर पंचायत के उप मुख्य पार्षद कौशलेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि विद्यालय में 80 प्रतिशत बच्चे दलित व महादलित हैं. यदि सरकार सही मायने में शिक्षा के विकास के प्रति चिंतित है तो ऐसे विद्यालयों को चिह्न्ति कर उनकी समस्याओं का समाधान करने की जरूरत है.
