क्लब रोड में हुई घटना
14 सीट वाली बस में सवार थे दो दर्जन से अधिक बच्चे
औरंगाबाद शहर : मंगलवार को संत जेवियर स्कूल की बस पलटने से बच गयी. बस छुट्टी होने के बाद बच्चों को घर छोड़ने के लिए क्लब रोड से गुजर रही थी. इस दौरान एक अन्य छोटे वाहन को साइड देने के क्रम में सड़क के किनारे किचड़नुमा गड्ढे में फंस गयी और पलटते-पलटते बच गयी. बस में प्राथमिक वर्ग में पढ़नेवाले करीब दो दर्जन से अधिक मासूम बच्चे सवार थे. बस से किसी तरह बच्चों को बाहर निकाला गया.
दो घंटे तक फंसा रहा वाहन : क्लब रोड मुहल्ले में दो घंटे तक वाहन गड्ढे में फंसी रही. चालक द्वारा वाहन को निकालने का काफी प्रयास किया गया, लेकिन जब वाहन गड्डे से नहीं निकल सकी, तो चालक द्वारा स्कूल प्रबंध को सूचना दी गयी. इस दौरान बच्चे कड़ी धूप में खड़े रहे. जब वाहन पलटने से बची गयी तो बच्चों को किसी तरह बाहर इमरजेंसी खिड़की से बाहर निकाला गया. जब तक वाहर फंसी रही तब तक मासूम बच्चे कड़ी धूप में खड़े रहे. घटना के समय अपने बच्चे को लेने पहुंचे एक अभिभावक ने कहा कि विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही है. तत्काल कोई सूचना नहीं दी गयी. वाहन सुविधा के नाम पर मोटी रकम ली जाती है और को भेड़-बकरी तक तरह ढोया जाता है. बच्चे वाहन में खड़े-खड़े आते-जाते हैं. उपर से इस तरह की घटना घटने से घंटों धूप में खड़ा रखना विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही है.
मुझे नहीं है जानकारी : निदेशक
वाहन के गड्ढे में फंसने के बाद चालक द्वारा बताया गया कि उसने प्रबंधन को इसकी सूचना दे दी है, लेकिन जब इस संबंध में शाम करीब सात बजे निदेशक मनीष चंद्रा के मोबाइल नंबर 9956002770 पर संपर्क कर पूछा गया तो उन्होंने इस तरह की कोई भी जानकारी नहीं . इससे स्कूल की और भी लापरवाही सामने उजागर होती है. छोटे मासूम बच्चे भूखे-प्यासे खड़क पर खड़े हैं और प्रबंधन को जानकारी तक नहीं है. इससे सजह अंजादा लगाया जा सकता है कि स्कूल बच्चों को घर तक सुरक्षित पहुंचाने के प्रति कितना सजग है. वैसे निदेशक ने स्पष्ट तौर पर कहा कि लापरवाही मामले की वे पड़ताल करेंगे.
पिछले सप्ताह की बैठक में निजी विद्यालयों के लिए दिये थे कई निर्देश
पिछले सप्ताह व इसके पूर्व की एक-दो बैठकों में डीएम राहुल रंजन महिवाल ने निजी विद्यालयों में चलने वाली वाहनों के संबंध में कई निर्देश दिये थे. डीएम ने निजी विद्यालयों को खटारा बस से बच्चों को नहीं ढोने का सख्त निर्देश दिया था. इसके अलावा यह भी निर्देश दिये गये थे स्कूल वाहनों की खिड़कियों में जाली लगाने, इमरजेंसी द्वार रखने, स्पीड गवर्नर लगाने संबंधि निर्देश दिये थे. जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला परिवहन पदाधिकारी को भी निजी स्कूलों की वाहनों की जांच करने का निर्देश दिया था.
