Arwal News: जिले को हरा-भरा बनाने तथा पर्यावरण संतुलन को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 'जल जीवन हरियाली अभियान' के तहत बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान शुरू किया जा रहा है. ग्रामीण विकास विभाग एवं मनरेगा के संयुक्त तत्वावधान में जी रामजी योजना के तहत जिलेभर में कुल 1 लाख 53 हजार 600 पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है. यह पौधरोपण सरकारी भूमि के साथ-साथ किसानों की निजी और परती पड़ी जमीनों पर भी कराया जाएगा.
निजी जमीन पर पौधरोपण करने पर मिलेंगे कई फायदे
कृषि प्रधान जिला होने के कारण किसानों की खाली या बंजर पड़ी भूमि के सदुपयोग के लिए यह योजना बेहद लाभकारी साबित होगी:
- मुफ्त पौधे व उर्वरक: योजना के अंतर्गत किसानों को उनकी मांग के अनुसार मनपसंद पौधे और उनकी सुरक्षा हेतु आवश्यक उर्वरक पूरी तरह निःशुल्क दिए जाएंगे.
- सिंचाई हेतु चापाकल: पौधों की नियमित सिंचाई के लिए प्रति यूनिट (200 पौधे) पर मनरेगा की ओर से डीप बोरिंग युक्त चापाकल स्थापित किया जाएगा.
- 5 वर्षों तक मजदूरी: पौधों की देखरेख व सुरक्षा के लिए किसान स्वयं या किसी व्यक्ति को रख सकते हैं, जिसे विभाग द्वारा 5 वर्षों तक प्रति वर्ष 100 दिनों का पारिश्रमिक (मजदूरी) दिया जाएगा.
- दोहरा लाभ: पर्यावरण संरक्षण में योगदान के साथ-साथ किसान बड़े होने पर पेड़ों से मिलने वाले फल बेचकर अतिरिक्त आमदनी भी अर्जित कर सकेंगे.
5 एकड़ से कम जमीन वाले लघु व सीमांत किसान ले सकते हैं लाभ
इस योजना का लाभ विशेष रूप से उन लघु एवं सीमांत किसानों को दिया जाएगा, जिनके पास 5 एकड़ से कम भूमि है. एक यूनिट के तहत किसान को 200 पौधे उपलब्ध कराए जाएंगे. इच्छुक किसान स्थानीय पंचायत रोजगार सेवक या प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी के पास आवेदन कर इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं.
प्रत्येक ग्राम पंचायत में लगेंगे 2,400 पौधे, प्रखंडवार लक्ष्य निर्धारित
जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में मनरेगा योजना से 2,400 पौधे लगाए जाएंगे. प्रखंडवार निर्धारित लक्ष्य इस प्रकार है:
- करपी प्रखंड: 45,600 पौधे
- कलेर प्रखंड: 36,000 पौधे
- अरवल प्रखंड: 28,800 पौधे
- कुर्था प्रखंड: 26,400 पौधे
- वंशी प्रखंड: 19,200 पौधे
क्या कहते हैं पदाधिकारी
"जिले के प्रत्येक ग्राम पंचायत क्षेत्र में 2,400 पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. किसान अपनी निजी भूमि पर भी योजना के तहत पौधे लगाकर निःशुल्क सिंचाई सुविधा और 5 साल तक देखरेख मजदूरी का लाभ ले सकते हैं." — आलोक कुमार, जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO), अरवल
