खेल मैदान के अभाव में स्कूलों में नहीं बज रही खेल की घंटी, जिले के सिर्फ 23 प्लस-2 विद्यालयों में ही खेल मैदान की सुविधा

Arwal News: अरवल जिले के सरकारी स्कूलों में खेल मैदान की कमी के कारण बच्चों की खेल प्रतिभा दम तोड़ रही है. जिले के 72 उच्चतर विद्यालयों में से 50 विद्यालयों के पास खेल मैदान नहीं है. वहीं जिले के अधिकांश सरकारी स्कूलों में करोड़ों रुपये की खेल सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद खेल गतिविधियां संचालित नहीं हो पा रही हैं.

Arwal News: (निशिकांत) अरवल जिले के सरकारी स्कूलों में खेल मैदान की कमी के कारण बच्चों की खेल प्रतिभा दम तोड़ रही है. जिले के 72 उच्चतर विद्यालयों में से 50 विद्यालयों के पास खेल मैदान नहीं है. वहीं जिले के अधिकांश सरकारी स्कूलों में करोड़ों रुपये की खेल सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद खेल गतिविधियां संचालित नहीं हो पा रही हैं.

सरकार स्कूली बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ खेल प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से दो वर्ष पहले खेल सामग्री उपलब्ध कराई थी. लेकिन अधिकांश विद्यालयों में खेल मैदान नहीं होने के कारण यह सामग्री स्कूल के कमरों में ही बंद पड़ी हुई है. गिने-चुने प्लस-2 विद्यालयों में जिम की सुविधा भी दी गई थी, लेकिन शारीरिक शिक्षकों की कमी के कारण जिम उपकरण भी धूल फांक रहे हैं.

जिले में कुल 599 विद्यालय संचालित हैं। इनमें 319 प्राथमिक विद्यालय, 207 मध्य विद्यालय और 73 उच्च एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं. शिक्षा विभाग के अनुसार, केवल 5 उच्च विद्यालय और 23 प्लस-2 विद्यालयों में ही खेल मैदान की सुविधा उपलब्ध है. इस प्रकार जिले के 576 विद्यालयों में खेल मैदान नहीं होने से बच्चों की खेल प्रतिभा प्रभावित हो रही है.

खेल सामग्री खरीदने के लिए प्राथमिक विद्यालयों को प्रति विद्यालय 5 हजार रुपये, मध्य विद्यालयों को 10 हजार रुपये तथा माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 25 हजार रुपये उपलब्ध कराए गए थे. इसके बावजूद खेल मैदान के अभाव में बच्चे खेल गतिविधियों से वंचित हैं.

खेल मैदान की कमी से बच्चों पर पड़ रहा शारीरिक और मानसिक प्रभाव

सदर अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पंकज कुमार ने बताया कि खेलने की कमी के कारण बच्चों में मोटापा, मधुमेह, थायराइड और मानसिक तनाव जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है. उन्होंने कहा कि उचित खेल मैदान नहीं होने से बच्चों की प्रतिभा निखर नहीं पाती, जिससे खेल प्रतिभाएं दम तोड़ रही हैं.

उन्होंने बताया कि मैदान नहीं होने के कारण बच्चे घंटों मोबाइल गेम खेलने में समय बिता रहे हैं, जिससे उनमें चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है. बाहर खेलकूद करने से बच्चों में टीम वर्क, सहयोग और अनुशासन की भावना विकसित होती है, लेकिन मैदान के अभाव में यह संभव नहीं हो पा रहा है. साथ ही बच्चे सड़कों और तंग गलियों में खेलने को मजबूर हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है.

क्या कहते हैं पदाधिकारी

शिक्षा विभाग के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी नीरज कुमार ने बताया कि जिले में केवल पांच हाई स्कूल और 23 प्लस-2 उच्च विद्यालयों में ही खेल मैदान उपलब्ध है. बाकी विद्यालयों में खेल मैदान नहीं है. उन्होंने कहा कि विद्यालयों में खेल मैदान की व्यवस्था के लिए शिक्षा विभाग लगातार प्रयास कर रहा है.

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