अरवल में हेलमेट नहीं पहनने से बढ़ रहे सड़क हादसे, तीन महीने में 44 लोगों की गई जान

अरवल जिले में तेज रफ्तार, बिना हेलमेट बाइक चलाना और ट्रिपल राइडिंग सड़क हादसों का बड़ा कारण बन रहा है. इस वर्ष अप्रैल तक अलग-अलग दुर्घटनाओं में 44 लोगों की मौत हो चुकी है. प्रशासनिक बैठकों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही. इंटरसेप्टर मशीन की कमी से ओवरस्पीड वाहनों पर नियंत्रण नहीं लग पा रहा.

Arwal News: (निशिकांत की रिपोर्ट) अरवल जिले में सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी लोगों की जान पर भारी पड़ रही है. तेज रफ्तार, बिना हेलमेट बाइक चलाना और तीन सवारी के साथ वाहन चलाना सड़क हादसों का मुख्य कारण बन गया है. परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में होने वाले 60 प्रतिशत से अधिक सड़क हादसे तेज रफ्तार के कारण हो रहे हैं.

अप्रैल तक 44 लोगों की मौत

जिले में इस वर्ष अप्रैल माह तक अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में 44 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें सबसे अधिक मौत बाइक सवारों की हुई है. अधिकांश मामलों में बाइक चालक बिना हेलमेट के पाए गए.

नाबालिग चला रहे वाहन

सड़क हादसों का दूसरा बड़ा कारण नाबालिगों द्वारा ट्रैक्टर, ऑटो, बाइक और अन्य वाहन चलाना बताया जा रहा है. जिन हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, वे हाईवे पर स्टेयरिंग संभाल रहे हैं. इससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है.

प्रशासनिक बैठकों के बावजूद नहीं दिख रहा असर

जिला प्रशासन की ओर से समय-समय पर सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की जाती है. बैठकों में हादसों को रोकने के लिए कई दिशा-निर्देश भी दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन होता नजर नहीं आता.

इंटरसेप्टर मशीन नहीं होने से कार्रवाई प्रभावित

तेज गति से वाहन चलाने वालों पर लगाम लगाने के लिए जिले में इंटरसेप्टर मशीन की व्यवस्था नहीं है. इसके कारण ओवरस्पीड वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती. स्थानीय थाना और परिवहन विभाग द्वारा कभी-कभार जांच अभियान चलाया जाता है, लेकिन यह अभियान अधिकतर खानापूर्ति बनकर रह जाता है.

लोगों से नियम पालन की अपील

सड़क सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों ने लोगों से हेलमेट पहनने, निर्धारित गति में वाहन चलाने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की है, ताकि सड़क हादसों में कमी लाई जा सके.

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Published by: Nikhil Anurag

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