कलेर (अरवल) से अंजनी कुमार की रिपोर्ट
Arwal News: अरवल जिले में एनएच-139 के किनारे कलेर से अरवल तक संचालित करीब एक दर्जन धर्मकांटे इन दिनों चर्चा का विषय बने हुए हैं. स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि इन धर्मकांटों पर केवल मालवाहक वाहनों की तौल ही नहीं होती, बल्कि बालू लदे ट्रकों की भी नियमित जांच और तौल की जाती है. आरोप है कि निर्धारित मात्रा से अधिक बालू मिलने पर उसे वहीं उतरवा लिया जाता है और बाद में उसी बालू को रात के अंधेरे में ट्रैक्टरों के माध्यम से बेचा जाता है.
प्रतिदिन दर्जनों ट्रकों की होती है तौल
स्थानीय लोगों के अनुसार प्रत्येक धर्मकांटे पर प्रतिदिन दो से तीन दर्जन बालू लदे ट्रकों की तौल होती है. तौल के दौरान ट्रकों से निकाले गए अतिरिक्त बालू का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा जाता. आरोप है कि यही बालू रात के समय ट्रैक्टरों पर लादकर आसपास के इलाकों में बेची जाती है. यदि आरोप सही साबित होते हैं तो इससे सरकार को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है.
लंबे समय से चल रहा है कथित खेल
लोगों का कहना है कि यह कथित अवैध कारोबार कोई नया मामला नहीं है, बल्कि लंबे समय से जारी है. कलेर से लेकर अरवल तक एनएच-139 किनारे स्थित कई धर्मकांटों पर इस तरह की गतिविधियों की चर्चा आम है. इसके बावजूद अब तक किसी बड़े स्तर पर जांच या कार्रवाई नहीं होने से लोगों में सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
अतिरिक्त बालू का हिसाब कौन रख रहा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्रतिदिन बड़ी मात्रा में बालू ट्रकों से उतारी जाती है, तो उसका रिकॉर्ड किसके पास है और वह बालू आखिर कहां जाती है. यह एक महत्वपूर्ण सवाल है, जिसका जवाब संबंधित विभागों को देना चाहिए. लोगों का आरोप है कि अतिरिक्त बालू की निकासी और बिक्री की निगरानी नहीं होने से अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है.
क्या कहते हैं जिला खनन पदाधिकारी
इस संबंध में जिला खनन पदाधिकारी अनिल कुमार ने कहा कि धर्मकांटों के लाइसेंस संबंधी जानकारी माप-तौल विभाग से प्राप्त की जानी चाहिए, क्योंकि लाइसेंस जारी करने की जिम्मेदारी उसी विभाग की है. अतिरिक्त बालू की बिक्री के आरोपों पर उन्होंने कहा कि पहले यह जांच की जाएगी कि संबंधित बालू वैध है या अवैध. यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
जांच की मांग तेज
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि धर्मकांटों पर ट्रकों से उतारी जा रही अतिरिक्त बालू का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है और इससे सरकार को हो रहे संभावित राजस्व नुकसान की वास्तविक स्थिति क्या है.
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