अरवल कोर्ट का कड़ा रुख: समय पर केस डायरी न देने पर जांच अधिकारी पर लगा 5000 प्रतिदिन का जुर्माना

Arwal News : अरवल की एक अदालत ने समय पर केस डायरी कोर्ट में पेश नहीं करने के कारण दोषी अनुसंधान पदाधिकारी पर प्रतिदिन 5,000 रुपये का भारी अर्थदंड (जुर्माना) लगाया है.

Arwal News :  (अरवल से निशिकांत की रिपोर्ट)

न्यायालय के आदेशों की अनदेखी और समय पर केस डायरी प्रस्तुत न करना एक पुलिस अनुसंधान पदाधिकारी (IO) को भारी पड़ गया है. अरवल की एक अदालत ने समय पर केस डायरी कोर्ट में पेश नहीं करने के कारण दोषी अनुसंधान पदाधिकारी पर प्रतिदिन 5,000 रुपये का भारी अर्थदंड (जुर्माना) लगाया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब तक केस डायरी अदालत के समक्ष पेश नहीं की जाती, तब तक यह जुर्माना रोजाना लागू रहेगा.

अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लिया एक्शन

मामले की जानकारी देते हुए अधिवक्ता सुरेश यादव ने बताया कि शहर तेलपा थाना कांड संख्या 11/26 के आरोपी नीरज कुमार ने गिरफ्तारी से बचने के लिए न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका संख्या 492/2026 दाखिल की थी. इस याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्यों को देखने के लिए संबंधित अनुसंधान पदाधिकारी से केस डायरी की मांग की थी.

कई तारीखें बीतने पर भी नहीं चेती पुलिस

अदालत द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए जाने और कई तारीखें (सुनवाई की तिथियां) बीत जाने के बाद भी अनुसंधानकर्ता द्वारा केस डायरी न्यायालय में प्रस्तुत नहीं की गई. पुलिस के इस ढुलमुल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये को अदालत ने न्याय प्रक्रिया में बाधा माना.

30 मई तक का मिला अल्टीमेटम

इसके बाद जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम (अरवल) के प्रभारी न्यायाधीश मनीष कुमार पांडे की अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए अनुसंधान पदाधिकारी पर 5,000 रुपये प्रतिदिन का जुर्माना ठोक दिया. अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 मई की तिथि निश्चित की है और उस दिन हर हाल में डायरी प्रस्तुत करने का आदेश दिया है.

लापरवाही पर जवाबदेही तय

अदालत के इस कड़े आदेश से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. कानूनी जानकारों का कहना है कि अक्सर पुलिस द्वारा केस डायरी समय पर जमा नहीं करने के कारण जमानत याचिकाओं और मुख्य मुकदमों की सुनवाई में देरी होती है, जिससे आम लोगों को जेल में सड़ना पड़ता है या न्याय मिलने में विलंब होता है. अरवल कोर्ट के इस फैसले से लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी.

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Published by: Rajeev Kumar

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