आरा : 3.88 करोड़ की लागत से बनने वाला संस्कृति भवन का निर्माण कार्य ठप, नगरवासी परेशान

आरा का एकमात्र संस्कृति भवन, जिसे 3.88 करोड़ की लागत से आधुनिक सुविधाओं के साथ नया रूप दिया जाना था, उसका पुनर्निर्माण कार्य वर्षों से ठप पड़ा है. इससे शहरवासियों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

नगर का एकमात्र संस्कृति भवन, जिसे नए और आधुनिक लुक में निखारने की कवायद शुरू हुई थी, उसका पुनर्निर्माण कार्य फिलहाल ठप पड़ा हुआ है.

तत्कालीन केंद्रीय मंत्री आरके सिंह द्वारा जब इसके पुनर्निर्माण कार्य का शिलान्यास किया गया था, तो शहरवासियों में काफी खुशी थी. लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही शहर को एक भव्य और सर्वसुविधायुक्त संस्कृति भवन मिलेगा, लेकिन वर्तमान में निर्माण कार्य बंद होने से लोगों की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है.

पुनर्निर्माण की प्रक्रिया के तहत परिसर की साफ-सफाई कराई गई थी तथा टूटे हुए दरवाजे, खिड़कियों और जर्जर छत को हटा दिया गया था. हालांकि, इसके बाद से काम आगे नहीं बढ़ सका है और वर्षों से अधूरा पड़ा है.

3.88 करोड़ की लागत से आधुनिक सुविधाओं का था प्रावधान

संस्कृति भवन का पुनर्निर्माण पावर ग्रिड द्वारा ₹3.88 करोड़ की लागत से किया जा रहा है. इसमें उत्तम दर्जे का आधुनिक साउंड सिस्टम, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और अन्य उच्च स्तरीय नागरिक सुविधाओं का प्रावधान किया गया है.

इससे पहले भवन में साउंड व्यवस्था बेहद खराब थी, जिससे किसी भी कार्यक्रम या परिचर्चा के दौरान लोगों को आवाज सही से सुनाई नहीं देती थी.

जर्जर तार और गंदगी बन चुकी थी पहचान

पुनर्निर्माण से पहले यह भवन उपेक्षा का शिकार था. जर्जर बिजली के तार, खराब व टेढ़े-मेढ़े पंखे, दीवारों में दरारें और चारों तरफ फैली गंदगी तथा बेतरतीब घास इसकी पहचान बन चुके थे, जो हर वक्त किसी दुर्घटना को आमंत्रण देते रहते थे.

प्रशासन द्वारा उचित रखरखाव (मेंटेनेंस) न किए जाने के कारण भवन की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई थी.

वर्ष 2010 में हुआ था निर्माण, होती थी हजारों की कमाई

शहर में सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए उपयुक्त स्थान की मांग को देखते हुए वर्ष 2010 में काफी तामझाम के साथ इस संस्कृति भवन का निर्माण कराया गया था.

इस भवन से प्रशासन को प्रतिमाह हजारों रुपये के राजस्व की प्राप्ति होती थी. किसी भी सांस्कृतिक व सामाजिक कार्यक्रम के लिए 8,000 रुपये प्रतिदिन तथा शादी-विवाह जैसे निजी आयोजनों के लिए 16,000 रुपये शुल्क लिया जाता था.

प्रतिमाह औसतन 10 से अधिक राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक कार्यक्रम यहां आयोजित होते थे.

अब निर्माण कार्य ठप रहने के कारण नगर वासियों को इस महत्वपूर्ण नागरिक सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिससे सामाजिक व सांस्कृतिक संगठनों को अपने कार्यक्रमों के आयोजन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

Also Read : गया जी : तीन दिन की बारिश से टूटी सड़क बनी परेशानी, शिकायत के बाद प्रशासन ने कराया दुरुस्त


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Narendra Prasad Sin

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.
Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >