Sugar Export Ban: जोगबनी (अररिया) से सुदीप भारती की रिपोर्ट. विदेश व्यापार महानिदेशालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार भारत सरकार ने कच्ची, सफेद और प्रसंस्कृत चीनी के निर्यात को 30 सितंबर 2026 तक या अगले आदेश तक पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है.
पहले चीनी निर्यात ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में था, लेकिन अब इसे ‘निषिद्ध’ श्रेणी में डाल दिया गया है. सरकार का कहना है कि घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाये रखने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह कदम उठाया गया है.
क्या होगा भारत सरकार के फैसले का असर
सरकार ने साफ किया है कि यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से लागू होगा. हालांकि यूरोपीय संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्धारित कोटा के तहत होने वाले निर्यात पर यह रोक लागू नहीं होगी. इसके अलावा अग्रिम प्राधिकरण योजना के तहत निर्यात पहले की तरह जारी रहेगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत सरकार का यह फैसला घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है, लेकिन इसका असर पड़ोसी देशों पर जरूर दिखाई देगा, खासकर नेपाल जैसे देशों पर जो भारतीय बाजारों पर काफी हद तक निर्भर हैं.
नेपाल की थाली से कम हो सकती है मिठास
भारत-नेपाल सीमा से जुड़े बाजारों में नेपाली ग्राहकों की बड़ी संख्या रोजाना खरीदारी के लिए पहुंचती है. खासकर चीनी की खरीदारी के लिए नेपाल के दूरदराज इलाकों से लोग भारतीय बाजारों में आते हैं. वर्तमान में भारतीय बाजारों में चीनी की कीमत 40 से 45 रुपये प्रति किलो के आसपास है, जबकि नेपाल में यही चीनी 80 से 90 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है.
ऐसे में निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगने के बाद नेपाल में चीनी की कीमतों में और वृद्धि होने की संभावना जतायी जा रही है. सीमावर्ती इलाकों के व्यापारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर साफ दिखेगा.
सीमावर्ती बाजारों में बढ़ी हलचल
भारत सरकार के फैसले के बाद सीमावर्ती बाजारों में चर्चा तेज हो गयी है. नेपाल के व्यापारियों और उपभोक्ताओं के बीच चिंता बढ़ रही है कि अगर लंबे समय तक प्रतिबंध जारी रहा तो वहां चीनी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. वहीं भारतीय बाजारों में भी लोग सरकार के इस फैसले को घरेलू कीमतों को स्थिर रखने की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं.
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