अररिया जिले के फारबिसगंज अनुमंडलीय अस्पताल में संचालित 'दीदी की रसोई' पिछले जून महीने से पूरी तरह बंद पड़ी है, जिसके कारण अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. भोजन की व्यवस्था ठप होने से प्रसव कक्ष, इमरजेंसी, जनरल वार्ड और ऑपरेशन के बाद भर्ती मरीजों को पौष्टिक आहार नहीं मिल पा रहा है. मजबूरी में परिजनों को बाहर के होटलों से महंगा भोजन खरीदना पड़ रहा है, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है.
भुगतान अटका, रसोई का चूल्हा हुआ बंद
अस्पताल में भर्ती मरीजों को शुद्ध एवं पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तुलसी जीविका महिला विकास स्वावलंबी सहकारी समिति द्वारा 'दीदी की रसोई' का संचालन किया जाता है:
- मरीजों की बढ़ी फजीहत: रसोई बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी प्रसूता महिलाओं, दूर-दराज से आए इमरजेंसी मरीजों और परिवार नियोजन व अन्य सर्जरी के बाद भर्ती मरीजों को हो रही है.
- परिजनों पर आर्थिक मार: सरकारी अस्पताल में नि:शुल्क भोजन की सुविधा होने के बावजूद परिजनों को जेब ढीली कर बाहर से खाना लाना पड़ रहा है.
8 से 9 महीने से अटका है भुगतान: जीविका बीपीएम
दीदी की रसोई के बंद होने का मुख्य कारण राज्य स्तर से बजट और राशि का जारी न होना बताया जा रहा है:
जीविका बीपीएम आशीष कुमार का बयान: "अस्पताल में संचालित दीदी की रसोई का लगभग आठ से नौ महीने से भुगतान लंबित है. विपत्र (Bills) जमा करने के बाद भी राज्य स्तर से राशि नहीं मिल सकी है. पिछले दो सालों से यह समस्या लगातार बनी हुई है और राशि न मिलने के कारण इससे पहले भी तीन बार रसोई का संचालन ठप हो चुका है."
अस्पताल प्रबंधक ने की पुष्टि
इस मामले पर अनुमंडलीय अस्पताल फारबिसगंज के प्रबंधक प्रवीण कुमार ने स्वीकार किया कि बजट व राशि के भुगतान के अभाव में 'दीदी की रसोई' का संचालन जून माह से पूरी तरह ठप है. उन्होंने माना कि भुगतान न होने से अस्पताल की भोजन व्यवस्था प्रभावित हुई है.
लंबे समय से भुगतान लंबित रहने और मरीजों की परेशानी को देखते हुए स्थानीय लोगों तथा परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों से बकाया राशि अविलंब जारी कर दीदी की रसोई को पुनः शुरू कराने की पुरजोर मांग की है.
