बथनाहा (अररिया) से विनय ठाकुर की रिपोर्ट
Road: बिहार के सीमावर्ती जिलों में बुनियादी ढांचागत निर्माण (Infrastructure Construction) में बरती जा रही कथित लापरवाही और घटिया गुणवत्ता का एक बेहद हैरान करने वाला मामला अररिया जिले के बथनाहा प्रखंड से सामने आया है. बथनाहा क्षेत्र के पथरदेवा एसएसबी (SSB) कैंप से भारत-नेपाल बॉर्डर को जोड़ने वाली मुख्य पीसीसी सड़क मंगलवार की शाम एक रहस्यमयी और बेहद तेज धमाके के साथ बीचो-बीच से दो फाड़ हो गई. धमाका इस कदर जोरदार था कि सड़क के ऊपर की भारी कंक्रीट ढलाई पूरी तरह उखड़कर हवा में बिखर गई और सड़क पर दूर तक गहरी व डरावनी दरारें आ गईं. इस अप्रत्याशित घटना के बाद आस-पास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों और राहगीरों में अफरा-तफरी मच गई. गनीमत यह रही कि धमाके के ठीक उस वक्त वहाँ से गुजर रहे कुछ मोटरसाइकिल सवार बाल-बाल बच गए, वरना कोई बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता था.
महज दो साल में उखड़ी 2.5 करोड़ की सड़क, निर्माण तकनीक पर गंभीर सवाल
भारत-नेपाल सीमा की इस महत्वपूर्ण सड़क के अचानक क्षतिग्रस्त होने के पीछे के मुख्य तकनीकी पहलुओं और ग्रामीणों के आक्रोश को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:
- लागत और भ्रष्टाचार का आरोप: स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों के अनुसार, मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क सड़क योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2024 में करीब 2.5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से इस सड़क का निर्माण कराया गया था. महज दो से ढाई साल के भीतर ही करोड़ों की लागत वाली इस मुख्य सड़क की ऐसी दुर्दशा ने विभागीय ठेकेदार और इंजीनियरों की मिलीभगत व निर्माण कार्य की गुणवत्ता (Quality Control) पर बहुत बड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
- संवेदक की मनमानी: ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान संवेदक (ठेकेदार) द्वारा बड़े पैमाने पर मानक के विपरीत बालू और घटिया कंक्रीट सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था. उस वक्त स्थानीय स्तर पर विरोध और शिकायत भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन प्रशासनिक रसूख के कारण उसे पूरी तरह अनसुना कर दिया गया.
क्यों हुआ धमाका? अत्यधिक गर्मी या ‘कंक्रीट ब्लो-अप’ (Concrete Blow-up) की आशंका
तकनीकी विश्लेषण: लोक निर्माण विभाग (PWD) के सेवानिवृत्त जानकारों और सिविल इंजीनियरों का मानना है कि जून के महीने में पड़ रही इस अप्रत्याशित प्रचंड गर्मी के कारण कंक्रीट के भीतर भारी फैलाव (Thermal Expansion) होता है. यदि पीसीसी सड़क के निर्माण के समय नियमों के मुताबिक निश्चित दूरी पर ‘एक्सपेंशन जॉइंट्स’ (Expansion Joints) यानी खिंचाव सोखने वाले गैप सही ढंग से न दिए गए हों, तो गर्मी की वजह से कंक्रीट आपस में टकराकर प्रेशर बनाती है. इसी दबाव के चलते अचानक ‘ब्लो-अप’ (Blow-up) होता है जो देखने और सुनने में किसी बम विस्फोट जैसा प्रतीत होता है. हालांकि, सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण कुछ स्थानीय लोग इसे किसी मामूली भूगर्भीय हलचल (Geological Movement) से भी जोड़कर देख रहे हैं.
सामरिक रूप से महत्वपूर्ण मार्ग; जूनियर इंजीनियर ने साधी चुप्पी
निष्कर्ष और विभागीय उदासीनता:
यह सड़क केवल आम ग्रामीणों के लिए ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा में तैनात एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) के जवानों की गश्त और त्वरित आवाजाही के दृष्टिकोण से भी बेहद संवेदनशील और सामरिक महत्व की है. प्रतिदिन हजारों की आबादी इस मार्ग से होकर जिला मुख्यालय पहुंचती है. सड़क के इस तरह अचानक ध्वस्त होने से बॉर्डर कनेक्टिविटी पूरी तरह प्रभावित हो गई है, जिससे लोगों में भारी रोष है.
ग्रामीणों ने जिला पदाधिकारी (DM) और ग्रामीण कार्य विभाग के मुख्य अभियंता से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी और फॉरेंसिक जांच कराई जाए और दोषी संवेदक का लाइसेंस रद्द करते हुए उस पर कानूनी कार्रवाई की जाए. इधर, जब इस पूरे मामले और तकनीकी खराबी के बाबत संबंधित कनीय अभियंता (Junior Engineer) राजकुमार निराला से संपर्क साधा गया, तो उन्होंने कैमरे के सामने कुछ भी बताने से साफ इनकार कर दिया और पल्ला झाड़ते नजर आए.
