अररिया. किसानों से लगातार बातचीत के बाद प्रभात खबर ने निर्धारित सरकारी दर से अधिक कीमत पर खाद बिक्री की शिकायतों को प्रमुखता से उठाया था. अब इस मामले में जिलाधिकारी विनोद दूहन की पहल के बाद कार्रवाई शुरू हुई है. 3 सितंबर को रानीगंज क्षेत्र भ्रमण के दौरान किसानों की शिकायत पर डीएम ने खाद बिक्री की स्थिति की जांच की. इसके बाद जिला कृषि पदाधिकारी पंकज कुमार ने मेसर्स शबा खाद बीज भंडार के प्रोपराइटर मो. मोजीबुर्रहमान की खुदरा उर्वरक अनुज्ञप्ति निलंबित कर दी. हालांकि, निलंबन आदेश में गोदाम में उपलब्ध यूरिया के स्टॉक का उल्लेख नहीं होने से विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं.
डीएम की जांच के बाद खाद दुकानदार पर कार्रवाई
3 सितंबर 2026 को रानीगंज में क्षेत्र भ्रमण के दौरान किसानों ने डीएम विनोद दूहन से सरकारी निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर यूरिया बेचे जाने की शिकायत की थी. शिकायत के बाद मामले की जांच करायी गयी. जांच के आधार पर जिला कृषि पदाधिकारी पंकज कुमार ने मेसर्स शबा खाद बीज भंडार, प्रो. मो. मोजीबुर्रहमान की खुदरा उर्वरक अनुज्ञप्ति डीएसएल-2090012557119 को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया.
266.50 रुपये निर्धारित है यूरिया की कीमत
निलंबन आदेश के अनुसार सरकार की ओर से यूरिया की निर्धारित कीमत 266.50 रुपये प्रति बोरा है. जांच के दौरान क्रेता किसानों ने विक्रेता पर निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत लेने का आरोप लगाया. आदेश में कहा गया है कि निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर उर्वरक की बिक्री उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 का उल्लंघन है.
जांच में सामने आयीं कई अनियमितताएं
अनुमंडल कृषि पदाधिकारी अररिया और प्रखंड कृषि पदाधिकारी रानीगंज की जांच में कई अनियमितताएं सामने आने की बात कही गयी है. मूल्य तालिका और सूचना पट्ट पर मूल्य एवं भंडारण की जानकारी स्पष्ट नहीं मिली. उर्वरक प्राधिकार पत्र की प्रति भी स्पष्ट नहीं थी. इसके अलावा भंडार पंजी में स्टॉक का स्पष्ट उल्लेख नहीं पाया गया. जांच टीम ने बिक्री पंजी में दर्ज किसानों से संपर्क भी किया. आदेश के अनुसार, किसानों से बातचीत में निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर यूरिया बेचे जाने की पुष्टि हुई.
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निलंबन आदेश में स्टॉक का उल्लेख क्यों नहीं
कार्रवाई के बाद अब जिला कृषि पदाधिकारी की ओर से जारी निलंबन आदेश ज्ञापांक 2461 को लेकर सवाल उठ रहे हैं. डीएम के निरीक्षण के दौरान उर्वरक के स्टॉक की जानकारी भी सामने रखने का निर्देश दिया गया था, लेकिन निलंबन आदेश में गोदाम में मौजूद यूरिया की वास्तविक मात्रा का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है.
यही बिंदु अब कार्रवाई की पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़ा कर रहा है. जब निर्धारित मूल्य से अधिक बिक्री की शिकायत की जांच हुई और स्टॉक से संबंधित अनियमितताएं भी दर्ज की गयीं, तो निलंबन आदेश में उपलब्ध खाद की मात्रा का उल्लेख क्यों नहीं किया गया, यह स्पष्ट नहीं है.
तय कोटे से अधिक यूरिया पहुंचने पर भी सवाल
जिले के कई प्रखंडों में यूरिया की कथित तस्करी और कालाबाजारी के मामले सामने आने के बाद रानीगंज में भी खाद की उपलब्धता और स्टॉक की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है. नरपतगंज, सिकटी और कुर्साकांटा सहित विभिन्न क्षेत्रों में तस्करी का यूरिया बरामद होने के मामलों का हवाला देते हुए अब यह सवाल उठ रहा है कि स्थानीय स्तर पर दुकानों तक खाद की आपूर्ति और स्टॉक की निगरानी कितनी प्रभावी है.
यदि किसी दुकान पर निर्धारित व्यवस्था से अधिक खाद पहुंच रही है या खाद की कालाबाजारी हो रही है तो आपूर्ति से लेकर बिक्री तक की पूरी श्रृंखला की जांच जरूरी है.
किसानों की शिकायत के बाद डीएम को खुद उतरना पड़ा मैदान में
खाद की निर्धारित कीमत से अधिक वसूली की शिकायतों के बीच डीएम का खुद क्षेत्र में पहुंचकर किसानों से बातचीत करना विभागीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है. स्थानीय स्तर पर कृषि अधिकारियों और निगरानी तंत्र की मौजूदगी के बावजूद यदि किसानों को निर्धारित दर पर खाद नहीं मिल रही थी, तो शिकायतों पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह भी जांच का विषय है.
विभागीय शिथिलता पर उठ रहे सवाल
खाद की कालाबाजारी और अधिक कीमत वसूली से सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ता है. ऐसे में जिला कृषि विभाग की कार्रवाई सिर्फ लाइसेंस निलंबन तक सीमित रहने के बजाय स्टॉक, आपूर्ति स्रोत, बिक्री और संबंधित किसानों से मिली शिकायतों की पूरी कड़ी की जांच तक पहुंचनी चाहिए. स्थानीय स्तर पर किसानों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या निगरानी में लापरवाही के कारण खाद की कालाबाजारी को बढ़ावा मिला. हालांकि, किसी भी विभागीय मिलीभगत या संरक्षण की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है. फिलहाल निलंबन आदेश में स्टॉक का विवरण नहीं होने और जिले में खाद तस्करी के मामलों के बीच विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े हो गए हैं.
10 सितंबर तक स्पष्टीकरण देने का निर्देश
निलंबन अवधि में संबंधित दुकान से सभी प्रकार के उर्वरकों के क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी गयी है. दुकानदार को 10 सितंबर 2026 तक साक्ष्य सहित अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है. निर्धारित समय में जवाब मिलने के बाद विभाग यह तय करेगा कि उर्वरक अनुज्ञप्ति को रद्द किया जाए या नहीं.
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