अररिया जिले के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र नरपतगंज बाजार स्थित अंडरपास में जलजमाव की विकराल समस्या ने आम जनजीवन को पूरी तरह बेपटरी कर दिया है. बरसात का मौसम आते ही इस अंडरपास में घुटने भर गंदा पानी जमा हो जाता है, जिससे प्रमुख आवागमन मार्ग पूरी तरह ठप पड़ जाता है. निकासी की कोई मुकम्मल व्यवस्था न होने की वजह से कई वर्षों से यह संकट जस का तस बना हुआ है. प्रशासनिक उपेक्षा और जनप्रतिनिधियों की बेरुखी से आक्रोशित स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है और जल्द स्थायी समाधान न होने पर हाईवे जाम कर सड़क पर उतरने की दो टूक चेतावनी दे दी है.
निकासी का अभाव, मामूली फुहारों में ही बन जाता है तालाब
स्थानीय नागरिकों के अनुसार यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि हर साल बरसात में अंडरपास तालाब की शक्ल अख्तियार कर लेता है. जल निकासी के लिए नालों का निर्माण न कराए जाने और ड्रेनेज सिस्टम पूरी तरह फेल होने के कारण बारिश का सारा पानी अंडरपास में आकर ठहर जाता है. आलम यह है कि हल्की बारिश के बाद भी यहां से सुरक्षित गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं रहता.
स्कूली बच्चे और राहगीर बेहाल, पानी में फंस रहे वाहन
अंडरपास में जमा दूषित पानी से होकर गुजरने वाले छोटे-छोटे स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और बाजार खरीदारी करने आने वाले ग्राहकों को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है. कई मर्तबा पानी की गहराई का अंदाजा न मिलने के कारण बाइक, ऑटो और चार पहिया वाहन बीच पानी में बंद होकर फंस जाते हैं. राहगीरों को अक्सर कीचड़ और बदबूदार पानी से होकर गुजरना पड़ता है या फिर कई किलोमीटर का चक्कर लगाकर गंतव्य तक जाना पड़ता है.
कारोबार पर सीधी मार, महामारी का बढ़ा अंदेशा
जलजमाव का सीधा नकारात्मक असर नरपतगंज बाजार के खुदरा व थोक कारोबार पर पड़ रहा है. मुख्य रास्ते में पानी भरे होने से ग्रामीण क्षेत्रों के ग्राहक बाजार आने से कतराने लगे हैं, जिससे दुकानदारों की दैनिक बिक्री औंधे मुंह गिर गई है. इसके अलावा कई दिनों तक रुके हुए गंदे पानी से तेज सड़ांध उठने लगी है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे क्षेत्र में डेंगू, मलेरिया और संक्रामक बीमारियां फैलने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है.
आश्वासन बहुत मिले, नहीं हुआ काम; अब आंदोलन की तैयारी
ग्रामीणों का कहना है कि इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय विधायक, सांसद और जिला प्रशासन के आला अधिकारियों को कई बार लिखित आवेदन दिए गए और मौखिक गुहार भी लगाई गई. हर बार केवल खोखले आश्वासन ही नसीब हुए, लेकिन धरातल पर पानी निकासी के लिए कोई ठोस योजना शुरू नहीं की गई. आक्रोशित स्थानीय निवासियों ने दो टूक कहा है कि यदि प्रशासन ने तुरंत ड्रेनेज की स्थायी व्यवस्था नहीं की, तो वे मुख्य मार्ग को जाम कर उग्र प्रदर्शन करने के लिए विवश होंगे.
