जब थानेदार को पटक कर क्रांतिकारियों ने छीन ली चाबी, गोलियों की बौछार के बीच फहराया तिरंगा; पढ़ें कुर्साकांटा के रणबांकुरों की शौर्य गाथा

1942 की अगस्त क्रांति के दौरान अररिया जिले के कुर्साकांटा प्रखंड के वीर सपूतों ने अंग्रेजी हुकूमत के दांत खट्टे कर दिए थे. थानेदार को पटक कर चाबी छीनने और गोलियों की बौछार के बीच तिरंगा फहराने की उनकी अनूठी शौर्य गाथा यहाँ पढ़ें.

भारत के स्वाधीनता संग्राम में अररिया जिले (सिकटी विधानसभा) के कुर्साकांटा प्रखंड का भी अहम योगदान रहा है. गुलामी की जंजीरों को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए यहां के रणबांकुरों ने अंग्रेजी हुकूमत के दांत खट्टे कर दिए थे. 1942 की अगस्त क्रांति के दौरान यहां के स्वतंत्रता सेनानियों ने ब्रिटिश पुलिस की गोलियों की परवाह किए बिना न सिर्फ कुआड़ी पुलिस स्टेशन (तत्कालीन ओपी) पर तिरंगा फहराया था, बल्कि गिरफ्तार किए गए अपने साथियों को भी थानेदार को पीटकर छुड़ा लिया था.

डाकघर और देशी शराब की दुकानें थीं निशाने पर

जब पूरे देश में 1942 की अगस्त क्रांति चरम पर थी, तब कुर्साकांटा और कुआड़ी के क्रांतिकारी भी उबल पड़े थे. 21 अगस्त को रामेश्वर यादव, कमलानंद विश्वास, विश्वनाथ गुप्ता, सीताराम गुप्ता, रामाश्रय हलवाई, रघुनंदन भगत, गोधुली ठाकुर, हरिलाल झा, नागेश्वर झा, अनुपलाल पासवान और रामचंद्र गुप्ता जैसे युवाओं की अगुवाई में विशाल जत्था निकला. आजादी के इन दीवानों ने अंग्रेजी शासन को चोट पहुंचाने के लिए सबसे पहले कुआड़ी और कुर्साकांटा के डाकघर, बड़ी व छोटी कचहरी और देशी शराब की दुकानों में जमकर तोड़फोड़ और आगजनी की घटना को अंजाम दिया.

थाना लूटने की बन रही थी योजना, पुलिस ने कर लिया गिरफ्तार

तोड़फोड़ के बाद सभी सेनानी 'मोती लाल राष्ट्रीय पाठशाला' (स्मारक भवन) में जमा हुए. वहां वे कुआड़ी थाना लूटने और उसे आग के हवाले करने की योजना बना ही रहे थे कि इसकी भनक अंग्रेजी पुलिस को लग गई. पुलिस की एक टुकड़ी ने मौके पर पहुंचकर छापेमारी की और रामेश्वर हलवाई, रामेश्वर यादव, विश्वनाथ गुप्ता, कमलानंद विश्वास, सीताराम गुप्ता, वासो साह उर्फ बसंत लाल साह, भगवान लाल साह और कुशेश्वर पासवान शास्त्री समेत कई प्रमुख चेहरों को गिरफ्तार कर हवालात में डाल दिया.

थानेदार को जमीन पर पटका, चाबी छीन साथियों को कराया मुक्त

नेताओं की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही सैकड़ों आजादी के दीवाने आग-बबूला हो गए और साथियों को छुड़ाने के लिए सीधे कुआड़ी थाने की ओर कूच कर गए. उस वक्त कुआड़ी थाने के तत्कालीन जमादार राम नगीना पांडेय ने पुलिस बल के साथ इस हुजूम को रोकने की कोशिश की. लेकिन भीड़ इतनी आक्रोशित थी कि उन्होंने राम नगीना पांडेय को उठाकर जमीन पर पटक दिया. इसके बाद क्रांतिकारियों ने कार्यालय और हवालात की चाबी छीनकर अपने साथियों को आजाद करा लिया. इसी बीच मौका पाकर कमलानंद विश्वास और रामेश्वर यादव ने कुछ साथियों के साथ थाने की छत पर चढ़कर शान से तिरंगा फहरा दिया.

बौखलाई पुलिस ने बरसाईं गोलियां, नेपाल में भूमिगत हुए क्रांतिकारी

थानेदार की पिटाई, हवालात टूटने और तिरंगा फहराए जाने से अंग्रेजी पुलिस बौखला गई. उन्होंने छिपकर निहत्थे आजादी के दीवानों पर गोलियों की बौछार कर दी. इस गोलीबारी में कुआड़ी, कुर्साकांटा, बखरी, परवत्ता, तीरा खारदह, डैनिया और उफरैल के कई रणबांकुरे गंभीर रूप से जख्मी हो गए. मौके से दर्जनों लोगों की गिरफ्तारी हुई, जबकि कई क्रांतिकारी जान बचाकर पड़ोसी देश नेपाल भाग गए और वहां भूमिगत होकर आंदोलन चलाते रहे. इन्हीं अनगिनत बलिदानों और संघर्षों का ही परिणाम है कि आज हम आजाद भारत में खुली सांस ले रहे हैं.


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By Prabhat khabar news desk

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