कटिहार-जोगबनी रेलखंड पर यात्रियों की भारी फजीहत: EMU ट्रेन चलाने की उठी मांग

Katihar Rail Section: पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के कटिहार-जोगबनी रेलखंड पर इन दिनों रेल यात्रियों को भारी किल्लत और भीड़भाड़ का सामना करना पड़ रहा है. सीमित संसाधनों और 11 से 14 जून तक कई मुख्य ट्रेनों के निरस्त होने के कारण स्टेशन पर पैर रखने की जगह नहीं है, जिसके बाद चेंबर ऑफ कॉमर्स सहित कई संगठनों ने इस रूट पर अविलंब ईएमयू (EMU) रैक वाली ट्रेनें चलाने की मांग की है.

अररिया के फारबिसगंज से मो. कलीम उद्दीन की रिपोर्ट

Katihar Rail Section: सीमांचल के सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक कटिहार–जोगबनी रेलखंड पर सफर करने वाले यात्रियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. वर्तमान में चल रही पारंपरिक डीएमयू (DMU) पैसेंजर ट्रेनों में क्षमता से अधिक भीड़ होने के कारण यात्रियों को जान जोखिम में डालकर सफर करना पड़ रहा है. बोगियों में पैर रखने तक की जगह नहीं होने से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को खड़े-खड़े ही लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. इस गंभीर संकट के बीच रेलवे द्वारा इस रूट की कई महत्वपूर्ण एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनों को 4 दिनों के लिए अचानक रद्द कर दिए जाने से स्टेशनों पर यात्रियों का गुस्सा और रेला दोनों चरम पर पहुंच गया है.

11 से 14 जून तक मुख्य ट्रेनें निरस्त; जोगबनी-फारबिसगंज के यात्रियों का संपर्क टूटा

रेलवे के इस फैसले से भारत-नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र के रेल नेटवर्क की कड़ियां बुरी तरह प्रभावित हुई हैं:

  • पैसेंजर ट्रेनें बंद: जोगबनी–कटिहार रेलखंड पर चलने वाली मुख्य लोकल सवारी गाड़ी (ट्रेन संख्या 75745/75746) के पहिए पूरी तरह थमे हुए हैं.
  • एक्सप्रेस सेवाओं पर ब्रेक: जोगबनी–सिलीगुड़ी इंटरसिटी एक्सप्रेस और जोगबनी–कोलकाता चितपुर एक्सप्रेस का परिचालन 11 जून से 14 जून तक पूरी तरह निरस्त (कैंसिल) कर दिया गया है.
  • कटिहार से शॉर्ट-टर्मिनेट: हालांकि चितपुर एक्सप्रेस को पूरी तरह बंद न करके कटिहार से कोलकाता के बीच चलाया जा रहा है, लेकिन जोगबनी, फारबिसगंज और अररिया कोर्ट स्टेशनों से सफर शुरू करने वाले हजारों दैनिक यात्रियों को इसका कोई फायदा नहीं मिल पा रहा है. इसके कारण व्यापारियों और छात्रों को गंतव्य तक पहुंचने के लिए महंगे सड़क परिवहन का सहारा लेना पड़ रहा है.

चेंबर ऑफ कॉमर्स और नागरिक समाज ने खोला मोर्चा; 2 जोड़ी EMU की मांग

प्रशासनिक उपेक्षा पर आक्रोश: “इस महत्वपूर्ण और भारी राजस्व देने वाले रेलखंड पर आज तक एक भी ईएमयू (इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट) रैक वाली ट्रेन नहीं चलाई गई है. आधुनिक रैक न होने के कारण कम डिब्बों में ही हजारों लोगों को ठूस-ठूस कर यात्रा करनी पड़ती है.”

इस अव्यवस्था और यात्रियों के दर्द को देखते हुए अररिया जिला चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष मूलचंद गोलछा और सचिव राकेश रोशन ने रेल प्रशासन से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है.

रेलवे को सौंपी गई संयुक्त मांगों की कड़ियां:

  1. EMU रैक की शुरुआत: बढ़ती भीड़ के स्थाई समाधान के लिए कटिहार-जोगबनी रूट पर तुरंत कम से कम 2 जोड़ी आधुनिक ईएमयू ट्रेनों का परिचालन शुरू किया जाए, जिसमें बोगियों की संख्या अधिक हो.
  2. ट्रेनों के फेरों में बढ़ोतरी: सुबह और शाम के पीक आवर्स (व्यस्त समय) में लोकल ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाए ताकि नौकरीपेशा और व्यवसायियों को सुविधा हो.

जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दी आंदोलन की चेतावनी

इस मांग को संबल देते हुए कटिहार मंडल रेल उपभोक्ता परामर्शदात्री समिति के सदस्य बच्छराज राखेचा, रेल यात्री संघ के चंदन भगत और युवा समाजसेवी सह व्यवसायी इजहार अंसारी ने कहा कि सीमांचल की एक बहुत बड़ी आबादी इस लाइफलाइन पर निर्भर है, लेकिन रेल प्रशासन हमेशा इस क्षेत्र की अनदेखी करता आया है.

जदयू प्रदेश सचिव रमेश सिंह, राजद व्यवसायी प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रधान महासचिव इंजीनियर आयुष अग्रवाल और नागरिक संघर्ष समिति के अध्यक्ष शाहजहां शाद ने संयुक्त रूप से कहा कि यदि इस महत्वपूर्ण रूट पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने और आधुनिक ईएमयू रैक देने की कड़ियों पर त्वरित काम शुरू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में उग्र जन-आंदोलन और रेल चक्का जाम किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी मालीगांव रेल मुख्यालय की होगी.

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लेखक के बारे में

Published by: Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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