अररिया/जोगबनी से मृगेंद्र मणि सिंह की रिपोर्ट
Nepal Vehicle Customs New Rules: बिहार के अररिया जिले से जुड़े अंतरराष्ट्रीय जोगबनी-विराटनगर सीमा से नेपाल जाने वाले भारतीय पर्यटकों और आम नागरिकों के लिए अब सीमा पार का सफर पहले जैसा आसान नहीं रह गया है. नेपाल सरकार के सीमा शुल्क विभाग (Department of Customs) द्वारा वाहन प्रवेश, भंसार (कस्टम ड्यूटी) और स्थानीय करों के नियमों में किए गए हालिया आधुनिकीकरण और प्रशासनिक कड़ाई का सीधा असर भारतीय सैलानियों पर पड़ रहा है. नियमों की स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी न होने के कारण अनजाने में ही सही, बड़ी संख्या में भारतीय वाहन भारी-भरकम जुर्माने के चक्रव्यूह में फंस रहे हैं. इसके साथ ही नेपाल के होटलों, रेस्टोरेंटों और बाजारों में मनमाने बिलिंग की शिकायतों से दोनों देशों के बीच होने वाले सीमावर्ती व्यापार और पर्यटन कड़ियों को बड़ा झटका लगा है.
परमिट चूका तो सीधे ₹2500 प्रतिदिन का फाइन; गाड़ी जब्त होने का भी खतरा
जोगबनी सीमा पार करने वाले चालकों और पर्यटकों के अनुसार, नेपाल में वाहनों की एंट्री को लेकर कड़े बदलाव किए गए हैं:
- सालाना अधिकतम सीमा: अब कोई भी भारतीय नंबर प्लेट वाला वाहन एक कैलेंडर वर्ष में अधिकतम 30 दिनों से ज्यादा नेपाल की सड़कों पर नहीं रह सकता है.
- परमिट की समय सीमा का उल्लंघन: भंसार काउंटर से तय दिनों का परमिट (यातायात अनुमति) लेने के बाद यदि कोई पर्यटक निर्धारित तिथि तक भारतीय सीमा में वापस नहीं लौटता है, तो उसके परमिट की अवधि समाप्त होते ही प्रतिदिन ₹2500 का भारी जुर्माना वसूला जा रहा है.
- जब्ती की कठोर कार्रवाई: नियमों में कड़ाई का आलम यह है कि यदि कोई वाहन बिना वैध नवीनीकरण या बिना परमिट के पाया जाता है, तो नेपाल पुलिस और सीमा शुल्क अधिकारी उसे सीधे जब्त कर ले रहे हैं, जिससे अपनी कार से सफर करने वाले परिवारों में डर का माहौल है.
₹62 (100 नेपाली मुद्रा) से अधिक की खरीदारी पर भी कड़ा टैक्स; बैगों की हो रही सघन जांच
सिर्फ गाड़ियां ही नहीं, बल्कि जोगबनी बॉर्डर से नेपाल के बाजारों में आम घरेलू सामान या कपड़ों की खरीदारी करने जाने वाले स्थानीय लोगों की कड़ियों पर भी कड़ा पहरा बिठा दिया गया है:
- कस्टम ड्यूटी का नया स्लैब: नए नियमों के अनुसार, मात्र 100 नेपाली मुद्रा (जो भारतीय मूल्य में लगभग ₹62 होती है) से अधिक की व्यावसायिक या घरेलू सामग्री लाने पर भी 5% से लेकर 80% तक सीमा शुल्क (कस्टम) लगाया जा रहा है.
- लाउडस्पीकर से चेतावनी: विराटनगर भंसार चौकी के समीप नेपाली अधिकारियों द्वारा लाउडस्पीकर के जरिए लगातार पर्यटकों को नियमों के उल्लंघन पर सामान जब्त करने की चेतावनी दी जा रही है, जिससे सीमा पार के पारंपरिक ‘रोटी-बेटी’ और बाजार के रिश्तों में थोड़ी कड़वाहट देखी जा रही है.
होटलों और रेस्टोरेंटों में मनमानी वसूली; पर्यटकों ने आर्थिक दोहन का लगाया आरोप
“नेपाल के विराटनगर, धरान और धनकुटा जैसे पर्यटन केंद्रों के होटलों, बार और रेस्टोरेंटों में भारतीय पर्यटकों को देखते ही मेन्यू कार्ड के बजाय मनमाने रेट वसूले जा रहे हैं. रेट लिस्ट को लेकर कोई स्पष्ट सरकारी नियंत्रण न होने से हमारा पूरा हॉलिडे बजट बिगड़ गया है.”
पर्यटकों का आरोप है कि कतिपय स्थानीय कारोबारी भारतीय करेंसी (INR) के मूल्य और विनिमय दर का हवाला देकर भी अतिरिक्त पैसों की मांग करते हैं, जिससे भारतीय नागरिकों को वहां असुरक्षा और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है.
भारत-नेपाल मैत्री के तहत नियमों को सरल बनाने की मांग; कारोबार पर पड़ा असर
बार-बार नियमों में बदलाव और भंसार की कड़क डिजिटल प्रक्रियाओं (जैसे ऑनलाइन टीआईवी प्रणाली) की जमीनी कड़ियों से वाकिफ न होने के कारण जोगबनी और विराटनगर के स्थानीय व्यापारियों का कारोबार भी मंदा हो गया है.
सीमा क्षेत्र के चैंबर ऑफ कॉमर्स और नियमित रूप से नेपाल जाने वाले प्रबुद्ध नागरिकों ने भारत सरकार के विदेश मंत्रालय और नेपाली वाणिज्य दूतावास से हस्तक्षेप की मांग की है. लोगों का कहना है कि दोनों देशों के सदियों पुराने दोस्ताना संबंधों को देखते हुए कम से कम आम पर्यटकों और छोटे वाहनों के लिए नियमों को थोड़ा लचीला, पारदर्शी और स्पष्ट किया जाना चाहिए, ताकि दोनों देशों के बीच पर्यटन उद्योग को पुनर्जीवित किया जा सके.
