अररिया से मृगेंद्र मणि सिंह की रिपोर्ट
Bangladeshi Prisoner: बिहार के अररिया जिला अंतर्गत मंडल कारा (जेल) से सुरक्षा व्यवस्था और विभागीय नियमों को ताक पर रखकर एक विदेशी घुसपैठिए को रिहा करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. इस गंभीर प्रशासनिक चूक और घोर लापरवाही को लेकर कारा एवं सुधार सेवाएं निरीक्षणालय, बिहार ने कड़ा रुख अपनाते हुए अररिया जेल के उपाधीक्षक प्रवीण कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. मुख्यालय द्वारा 11 जून 2026 को जारी इस निलंबन आदेश के बाद पूरे बिहार के जेल महकमे में हड़कंप मच गया है. प्रथम दृष्टया जांच में दोषी पाए जाने के बाद आरोपी उपाधीक्षक को विभागीय कार्रवाई के दायरे में लाते हुए केंद्रीय कारा मोतिहारी से अटैच (संबद्ध) कर दिया गया है.
क्या है पूरा मामला: बिना मुख्यालय को सूचना दिए विदेशी कैदी को छोड़ा
विभागीय आदेश और जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले की कड़ियां अररिया थाना में दर्ज एक पुराने आपराधिक मामले से जुड़ी हैं, जिसकी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
- विदेशी कैदी की पहचान: अररिया थाना कांड संख्या-521/2024 के तहत जेल में बंद बांग्लादेशी नागरिक नवाब उर्फ सुभान अली को स्थानीय न्यायालय से 31 जनवरी 2026 को रिहाई का आदेश प्राप्त हुआ था.
- एसओपी का उल्लंघन: नियमों के मुताबिक, यदि किसी विदेशी नागरिक या कैदी को कोर्ट से जमानत या रिहाई मिलती है, तो जेल प्रशासन को एक तय एसओपी (SOP) के तहत उसका स्थानीय और विदेशी पता सत्यापित करना होता है. साथ ही, इसकी लिखित सूचना गृह विभाग और कारा मुख्यालय को देनी होती है ताकि विदेशी नागरिक की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके या उसे डिटेंशन सेंटर भेजा जा सके.
- लगा घोर लापरवाही का आरोप: उपाधीक्षक प्रवीण कुमार पर आरोप है कि उन्होंने इन सभी अनिवार्य राष्ट्रीय सुरक्षा नियमों को दरकिनार किया और मुख्यालय को बिना किसी पूर्व सूचना या इनपुट दिए गुपचुप तरीके से बांग्लादेशी कैदी को जेल के फाटक से आजाद कर दिया.
मोतिहारी जेल किए गए संबद्ध; 3 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश
कारा महानिरीक्षणालय ने उपाधीक्षक के इस कृत्य को कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और देश की आंतरिक सुरक्षा से खिलवाड़ माना है. मुख्यालय द्वारा गठित जांच टीम की रिपोर्ट में आरोप पूरी तरह सही पाए गए, जिसके बाद निलंबन की यह बड़ी गाज गिरी:
- मुख्यालय से संबद्ध: निलंबन की अवधि के दौरान प्रवीण कुमार का मुख्यालय केंद्रीय कारा, मोतिहारी तय किया गया है. वे बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे.
- आरोप पत्र का गठन: मंडल कारा अररिया के मुख्य अधीक्षक को सख्त हिदायत दी गई है कि वे तीन दिनों के भीतर निलंबित उपाधीक्षक के खिलाफ विभागीय आरोप पत्र (प्रपत्र ‘क’) गठित कर पूरी रिपोर्ट पटना मुख्यालय को उपलब्ध कराएं.
- जीवन निर्वाह भत्ता: निलंबन की इस पूरी अवधि के दौरान उन्हें बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के प्रावधानों के तहत केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही देय होगा.
अपर सचिव सह निदेशक ने जारी किया आदेश; सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े
राष्ट्रीय सुरक्षा पर कड़ा रुख: विदेशी नागरिकों के मामले में जेल प्रशासन की ऐसी शिथिलता अक्षम्य है. न्यायालय के आदेश का पालन एसओपी के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए था.
यह कड़ा प्रशासनिक आदेश अपर सचिव-सह-निदेशक प्रोज्ञ संजीव जमींदार के हस्ताक्षर से जारी किया गया है. इस घटना के बाद स्थानीय इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और सुरक्षा एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए हैं, क्योंकि बिना सत्यापन के रिहा हुआ बांग्लादेशी नागरिक नवाब उर्फ सुभान अली फिलहाल कहां है, इसकी कोई पुख्ता जानकारी स्थानीय पुलिस के पास नहीं है. पुलिस अब रिहा हुए विदेशी नागरिक की तलाश में जुट गई है.
