अररिया से पंकज कुमार की रिपोर्ट
Fire Safety Audit: देश और राज्य के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में अस्पतालों और व्यावसायिक इमारतों में शॉर्ट सर्किट से लगी आग की कड़ियों को सबक मानते हुए अररिया जिला प्रशासन ने हाई-अलर्ट जारी किया है. जिलाधिकारी के निर्देश पर जिले के तमाम शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में संचालित होटलों, निजी नर्सिंग होम और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में विशेष ‘अग्नि अंकेक्षण’ (Fire Audit) अभियान शुरू किया गया है. जिला अग्निशमन पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार प्रसाद के नेतृत्व में गठित विशेष विंग की टीमों ने शनिवार को विभिन्न प्रखंडों में औचक छापेमारी की. इस दौरान कई जगहों पर अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) एक्सपायर्ड मिले, तो कहीं इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) के रास्तों पर कबाड़ जमा पाया गया, जिस पर अधिकारियों ने सख्त नाराजगी जताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी.
जोकीहाट से लेकर सिमराहा तक छापेमारी; इन प्रमुख होटलों का हुआ फायर ऑडिट
अग्निशमन विभाग की विशेष टीमों ने शनिवार को एनएच (NH) और मुख्य बाजारों में स्थित निम्नलिखित बड़े प्रतिष्ठानों की कड़ियों को खंगाला:
- आर्शीवाद रेस्टोरेंट (जोकीहाट): यहां रसोई और डाइनिंग एरिया में गैस पाइपलाइन और फायर सिलेंडर की क्षमता की जांच की गई.
- चंद्रिका होटल (जोकीहाट): इस व्यावसायिक परिसर में वेंटिलेशन और पानी के फॉल्ट्स को चेक किया गया.
- दरबार ढाबा (सिमराहा): एनएच किनारे स्थित इस व्यस्त ढाबे में सुरक्षा मानकों और कर्मचारियों की ट्रेनिंग का इनपुट लिया गया.
- होटल सीमांचल (अररिया): जिला मुख्यालय के इस प्रमुख होटल में स्प्रिंकलर सिस्टम और अलार्म यूनिट्स की कड़ियों की बारीकी से जांच हुई.
- होटल शिमला (जीरो माइल): इस व्यस्त चौक पर स्थित होटल में भी फायर ऑडिट कर कमियों का ब्यौरा तैयार किया गया.
नोटिस की कार्रवाई: जांच के दौरान जिन प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा मानकों की कड़ियां अधूरी पाई गईं, उन्हें विभाग द्वारा आधिकारिक कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. सभी को 15 दिनों की निश्चित समय-सीमा के भीतर कमियों को दूर कर एनओसी (NOC) के लिए री-अप्लाई करने का कड़ा निर्देश दिया गया है.
नियमों की कड़ाई: बिहार अग्निशमन सेवा अधिनियम 2014 के तहत नपेंगे संस्थान
कानूनी कड़ियां: “बिहार अग्निशमन सेवा अधिनियम-2014 और बिहार अग्निशमन सेवा नियमावली-2021 के कड़े प्रावधानों के तहत जिले की बहुमंजिला इमारतों और कमर्शियल हब के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है.”
जिला अग्निशमन पदाधिकारी डॉ. अशोक कुमार प्रसाद ने स्पष्ट किया कि यह अभियान केवल होटलों तक सीमित नहीं रहेगा. आगामी चरणों में निम्नलिखित श्रेणी के सार्वजनिक और निजी भवनों का कड़ा ऑडिट किया जाएगा:
- शैक्षणिक संस्थान: जिले के सभी निजी व सरकारी स्कूल, कोचिंग सेंटर और कॉलेज.
- चिकित्सा केंद्र: बड़े सरकारी अस्पताल, निजी नर्सिंग होम, पैथोलॉजी लैब और डायग्नोस्टिक सेंटर.
- कमर्शियल यूनिट्स: शॉपिंग मॉल, सिनेमा हॉल, पेट्रोल पंप, गैस एजेंसियां, बैंक और मैरेज हॉल.
“उपकरणों को केवल शोपीस न बनाएं, कार्यशील रखें”— जिला अग्निशमन पदाधिकारी
अग्निशमन विभाग ने सभी प्रतिष्ठान संचालकों, खासकर निजी अस्पतालों और होटलों के मालिकों से अपील की है कि वे सुरक्षा मानकों को केवल कागजी कोरम न समझें. भवनों में लगे वाटर हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर, फॉग सिस्टम और स्मोक डिटेक्टर को हमेशा रनिंग कंडीशन (कार्यशील अवस्था) में रखें.
इसके साथ ही अपने कर्मचारियों को मॉक ड्रिल (Mock Drill) के माध्यम से आपातकालीन स्थिति में गैस सिलेंडर बंद करने और आग बुझाने वाले रसायनों का उपयोग करने की बेसिक ट्रेनिंग जरूर दिलाएं. विभाग ने दो टूक शब्दों में कहा है कि समय-सीमा बीतने के बाद यदि दोबारा जांच में लापरवाही पकड़ी गई, तो संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ भारी जुर्माने के साथ-साथ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत सीधे सीलिंग और एफआईआर (FIR) की दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी.
