अररिया डीएम के जनता दरबार में उमड़ी भीड़: भूमि विवाद और राशन कार्ड से जुड़ी 102 शिकायतें दर्ज

DM Janta Darbar: बिहार सरकार के ‘सात निश्चय 3.0’ के तहत अररिया समाहरणालय में आयोजित जिलाधिकारी के जनता दरबार में शनिवार को शिकायतों का अंबार लग गया. जिले के विभिन्न सुदूर ग्रामीण इलाकों से पहुंचे 102 फरियादियों ने डीएम विनोद दूहन के समक्ष अपनी गुहार लगाई, जिस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को समय-सीमा के भीतर कड़े एक्शन का निर्देश दिया.

अररिया से पंकज कुमार की रिपोर्ट

DM Janta Darbar: राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘सात निश्चय 3.0: सबका सम्मान–जीवन आसान’ कार्यक्रम को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से अररिया के जिलाधिकारी (DM) विनोद दूहन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जनता दरबार का आयोजन किया गया. इस साप्ताहिक जन-सुनवाई में जिले के अलग-अलग प्रखंडों से आए कुल 102 लोगों ने मुख्य रूप से भूमि विवाद, दबंगों द्वारा जबरन कब्जा, जमाबंदी में गड़बड़ी, रोक सूची और राशन कार्ड में नाम जुड़वाने जैसी गंभीर प्रशासनिक व व्यक्तिगत कड़ियों से जुड़ी अपनी समस्याएं रखीं. जिलाधिकारी ने एक-एक कर सभी पीड़ितों के आवेदनों को गंभीरता से पढ़ा और मौके पर ही मौजूद विभागीय पदाधिकारियों की क्लास लगाते हुए कानूनी दायरे में जल्द से जल्द निष्पादन सुनिश्चित करने की चेतावनी दी.

दबंगों द्वारा जमीन कब्जा और रोक सूची से नाम हटाने की गूंज; ये मुख्य मामले आए सामने

जनता दरबार में आए 102 आवेदनों में से कुछ सबसे गंभीर और त्वरित कार्रवाई योग्य कड़ियों का विवरण नीचे दिया गया है:

  • निजी भूमि से बेदखली: मोहम्मद साजिद आलम और सलाउद्दीन ने जिलाधिकारी को दिए आवेदन में आरोप लगाया कि उन्हें सरकारी बंदोबस्त और पुश्तैनी निजी जमीन से स्थानीय दबंगों द्वारा जबरन बेदखल कर दिया गया है.
  • जबरन कब्जे की शिकायत: सदानंद ठाकुर, सुरेंद्र प्रसाद शाह और देवानंद शर्मा ने अपनी निजी रैयती भूमि पर असामाजिक तत्वों द्वारा अवैध निर्माण और जबरन कब्जे की कड़ियों के खिलाफ प्रशासनिक सुरक्षा की मांग की.
  • बेटी की शादी के लिए गुहार: संतोष ततमा नामक एक लाचार पिता ने भावुक आवेदन देते हुए कहा कि उन्हें अपनी बेटी की शादी करनी है, जिसके लिए वे अपनी जमीन बेचना चाहते हैं, लेकिन जमीन का नाम ‘रोक सूची’ (Banned List) में होने के कारण रजिस्ट्री नहीं हो पा रही है. उन्होंने इस सूची से नाम हटाने की गुहार लगाई.
  • राजस्व व खाद्य आपूर्ति के मामले: मोहम्मद जावेद अख्तर ने अपनी जमाबंदी में डिजिटल सुधार (Rectification) की मांग की, जबकि अब्दुल कलाम और मिन्हाज आलम ने महीनों से लंबित राशन कार्ड में नए पारिवारिक सदस्यों के नाम जोड़ने के संबंध में आवेदन सौंपा.

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निर्धारित समय-सीमा में निपटारे का निर्देश; लापरवाही पर नपेंगे अधिकारी

प्रशासनिक रुख: “जनता दरबार केवल आवेदन लेने का माध्यम नहीं है, बल्कि ऑन-स्पॉट समस्याओं को हल करने का जरिया है. जो भी अधिकारी फाइलों को दबाकर बैठेंगे, उन पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी.”

अधिकारियों को जवाबदेह बनाने के लिए जिलाधिकारी विनोद दूहन ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं:

  1. कानूनी जांच का आदेश: डीएम ने अंचलाधिकारी (CO) और अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) को निर्देश दिया कि भूमि विवाद से जुड़े सभी मामलों की जमीन पर जाकर विधिसम्मत जांच (Spot Verification) की जाए और दोनों पक्षों को बुलाकर मापी कराई जाए.
  2. समय-सीमा (Dead Line): राशन कार्ड और जमाबंदी सुधार जैसे तकनीकी और खाद्य आपूर्ति से जुड़े मामलों को अधिकतम 15 दिनों के भीतर ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट कर निष्पादित करने का कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है.

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनता के अधिकारों और उनके सम्मान की रक्षा करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है. जनता दरबार में आए सभी 102 आवेदनों को एक यूनिक ट्रैकिंग नंबर के साथ जिला शिकायत निवारण सेल को फॉरवर्ड कर दिया गया है, जिसकी मॉनिटरिंग खुद जिलाधिकारी के स्तर से की जाएगी.

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By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में परास्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे दैनिक जागरण में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने टी. एन. बी. कॉलेज से हिंदी साहित्य में स्नातक किया है, जिसके कारण साहित्य, पठन-पाठन, लेखन और कविता-सृजन में उनकी विशेष रुचि है। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

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