जोकीहाट. प्रखंड स्थित सूचना भवन के सामने रविवार को बिहार राज्य मध्यान्ह भोजन रसोइया संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में रसोइयों ने विरोध प्रदर्शन कर डीएम से जांच कर आरोपित के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. प्रदर्शन के दौरान रसोइयों ने संगठन से जुड़े कथित ठगी के मामलों को लेकर नाराजगी व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच व दोषियों पर कार्रवाई की मांग करते हुए नारेबाजी की. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि राष्ट्रीय मध्याह्न भोजन रसोइया फ्रंट से जुड़े कुछ पदाधिकारी वर्षों से रसोइयों का आर्थिक शोषण कर रहे हैं. संघ के प्रतिनिधियों ने बताया कि फ्रंट के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष उमाशंकर व उनकी पत्नी अमृता देवी पर करीब तीन वर्ष पूर्व जोकीहाट क्षेत्र की रसोइयों से प्रति व्यक्ति 230 रुपये वसूलने का आरोप है. उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2013 से राज्य के विभिन्न जिलों में लगभग दो लाख रसोइयों से इसी तरह राशि लेकर कार्ड बनाये गये लेकिन अब तक संगठन का कोई आधिकारिक खाता नहीं खोला गया. रसोइयों ने यह भी कहा कि वर्ष 2018 में इस मामले को लेकर केस दर्ज कराया गया था, परंतु अब तक उस पर कोई ठोस सुनवाई नहीं हो सकी है. इसके बावजूद केस के नाम पर रसोइयों से लाखों रुपये की वसूली जारी रहने का आरोप लगाया गया. प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने प्रशासन से पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की. वहीं बिहार राज्य मध्यान्ह भोजन रसोइया संघ के प्रदेश सचिव पवन कुमार एवं प्रदेश उपाध्यक्ष रंजू देवी ने कहा कि उनका संगठन सरकार के दायरे में रहकर रसोइयों के हित में लगातार कार्य कर रहा है. उन्होंने बताया कि मानदेय बढ़ोतरी और साल के बारह महीने काम सुनिश्चित कराने को लेकर राज्य और केंद्र स्तर पर मंत्रियों को पत्र भेजे गये हैं. पदाधिकारियों ने रसोइयों को सतर्क करते हुए कहा कि कार्ड बनाने के नाम पर ठगी की घटनाएं सामने आ रही है जिससे बचने की जरूरत है. उन्होंने आरोप लगाया कि हाल के दिनों में फिर से 120 रुपये की वसूली की गयी है जो पूरी तरह गलत है. संघ ने चेतावनी दी कि बिना किसी आधिकारिक बैठक व सूचना के रसोइयों को बुलाकर पैसे वसूलना अवैध है. प्रदर्शन में शांति देवी, निखत, परवीना, गुलशन, नीलम, असराना, अख्तरी, नौरस, बेबी देवी, दुखिया देवी, सोनिया देवी, शबनम सहित विभिन्न गांवों की दर्जनों रसोइयों ने प्रदर्शन किया.
कार्ड बनाने के नाम पर अवैध वसूली के विरुद्ध रसोइयों ने किया प्रदर्शन
पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग
