मुख्य बातें:
अररिया से पंकज कुमार की रिपोर्ट
Child Protection Committee: बिहार के सीमांचल क्षेत्र अंतर्गत अररिया जिला समाहरणालय स्थित आत्मन सभागार में एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक संपन्न हुई. जिलाधिकारी (DM) विनोद दूहन की अध्यक्षता में जिला बाल कल्याण व संरक्षण समिति की बैठक के साथ-साथ बाल कल्याण समिति की त्रैमासिक समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गयी. इस महत्वपूर्ण बैठक में बच्चों की सुरक्षा, पुनर्वास, अनिवार्य शिक्षा, बाल श्रम उन्मूलन और किशोर न्याय (Juvenile Justice) से जुड़े विभिन्न विधिक व सामाजिक मुद्दों की विस्तृत समीक्षा की गई तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए.
जेजेबी में लंबित मामलों पर डीएम ने जताई चिंता
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने किशोर न्याय परिषद (JJB) में लंबित मामलों के समय पर निष्पादन और उपस्थापन (Presentation) नहीं होने की समस्या पर गहरी चिंता व्यक्त की.
उन्होंने बैठक में मौजूद पुलिस अधीक्षक (SP) के प्रतिनिधि को सख्त निर्देश दिया कि वे थाना-वार लंबित मामलों की एक विस्तृत सूची तैयार करें. साथ ही, थानों के स्तर से नियमित रूप से जेजेबी के समक्ष मामलों का उपस्थापन सुनिश्चित कराया जाए ताकि पीड़ित बच्चों को समय पर न्याय मिल सके.
पॉक्सो एक्ट के मामलों में प्रपत्र-बी भरने का निर्देश
महिला और बाल सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से डीएम ने पॉक्सो (POCSO) अधिनियम से संबंधित मामलों की भी समीक्षा की. उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया कि पॉक्सो से जुड़े मामलों में प्रपत्र-बी (Form-B) को पूरी तरह और सही-सही भरकर निर्धारित समय-सीमा के भीतर बाल कल्याण समिति (CWC) को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें. इसके अलावा, उन्होंने पर्यवेक्षण गृह (Observation Home) की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करते हुए वहां रह रहे बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने का आदेश दिया.
मुक्त कराए गए बाल श्रमिकों को मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ
बाल श्रम उन्मूलन और शिक्षा से जुड़ी मुख्य विभागीय कड़ियों के निर्देश इस प्रकार हैं:
- श्रम अधीक्षक को निर्देश: बाल श्रम से रेस्क्यू कर मुक्त कराये गये बच्चों को केवल मुक्त कराकर न छोड़ा जाए, बल्कि उन्हें विभिन्न सरकारी कल्याणकारी व वित्तीय योजनाओं से जोड़कर उनके प्रभावी सामाजिक पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.
- जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) को निर्देश: बाल श्रम से मुक्त कराए गए और अन्य राज्यों से रेस्क्यू कर वापस लाए गए अररिया के बच्चों का स्थानीय सरकारी विद्यालयों व मदरसों में शीघ्र नामांकन (Admission) कराया जाए, ताकि उनकी पढ़ाई में कोई बाधा न आए.
- जिला कल्याण पदाधिकारी को निर्देश: महादलित विकास मिशन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ग्रामीण इलाकों में बाल श्रम, बाल विवाह और नाबालिगों के पलायन (Human Trafficking) से संबंधित मामलों में त्वरित विधिक कार्रवाई और अनुपालन सुनिश्चित करें.
Child Protection Committee: परवरिश योजना का दायरा बढ़ाने का टास्क
जिलाधिकारी ने बाल विकास परियोजना (ICDS) की जिला प्रोग्राम पदाधिकारी (DPO) को विशेष रूप से निर्देशित किया कि वे जिले में ‘परवरिश योजना’ के लाभुकों की संख्या बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाएं. ग्रामीण स्तर पर प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक पात्र और अनाथ/निःसहाय बच्चों को इस कल्याणकारी योजना का लाभ दिलाया जाए.
इसके साथ ही, समीक्षा बैठक में पड़ोसी जिलों—कटिहार व सुपौल के बाल सुधार व संरक्षण गृहों में आवासित अररिया जिले के बालक-बालिकाओं के पुनर्वास व उनके फॉलोअप (निगरानी) की स्थिति का भी तकनीकी आकलन किया गया. डीएम विनोद दूहन ने स्पष्ट किया कि बच्चों के अधिकारों और उनके पुनर्वास की प्रक्रिया समयबद्ध और पूरी तरह संवेदनशील होनी चाहिए, इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
