खानाबदोश सरकारी स्कूल को नहीं िमल रहा स्थायी पड़ाव

इसे विडंबना कहें या स्कूल का दुर्भाग्य, 42 वर्ष से चल रहे इस सरकारी को अब तक अपना भवन नसीब नही हो पाया है. अररिया : इसे विडंबना कहें या फिर लापरवाही, शहर का एक ऐसा सरकारी स्कूल है जो पिछले 42 वर्षों से खानाबदोश की तरह घुमंतू विद्यालय हो कर रह गया है. न […]

इसे विडंबना कहें या स्कूल का दुर्भाग्य, 42 वर्ष से चल रहे इस सरकारी को अब तक अपना भवन नसीब नही हो पाया है.

अररिया : इसे विडंबना कहें या फिर लापरवाही, शहर का एक ऐसा सरकारी स्कूल है जो पिछले 42 वर्षों से खानाबदोश की तरह घुमंतू विद्यालय हो कर रह गया है. न तो स्थानीय लोगों ने ध्यान दिया और न ही जनप्रतिनिधि अथवा प्रशासनिक पदाधिकारियों ने. अब वैसे सरकारी विद्यालय जो भूमिहीन हैं को किसी न किसी अन्य विद्यालय में समाहित किया जा रहा है. पर इस विद्यालय की नियति है कि वह इस सूची में भी शामिल नहीं है.
क्योंकि यह जिस मुहल्ले का विद्यालय है वहां से लगभग ढाई किलोमीटर से अधिक की दूरी पर इसे संचालित किया जा रहा है. हम बात कर रहे हैं शहर के प्राथमिक विद्यालय भगत टोला की. जो इस समय भगत टोला से लगभग ढाई किलोमीटर की दूरी संचालित हो रहा है. प्राथमिक विद्यालय भगत टोला को भूमि व भवन नहीं होने के कारण एमडीएम बनाने का काम मध्य विद्यालय रहिका टोला के किचेन में ही किया जाता है.
इतना ही नहीं इस विद्यालय को सरकारी लाभ के रूप में किसी तरह का कोई लाभ नहीं मिलता है. भूमिहीन होने के काराण इस विद्यालय को अपना भवन तो है ही नहीं साथ ही यहां न तो शौचालय है और न ही यहां चापाकल ही है. दूसरे विद्यालय के चापाकल से पानी लेना पड़ता है. इस विद्यालय में पदस्थापित पांच शिक्षकों में से चार शिक्षिका हैं. जिन्हें दूसरे विद्यालय के शौचालय पर निर्भर रहना पड़ता है जिससे छात्रों को भारी परेशानी होती है.
दूसरे स्कूल में समाहित करने में हो रही परेशानी
इस विद्यालय को दूसरे विद्यालय में समाहित करने में भी परेशानी हो रही है. शिक्षा विभाग के ताजा अधिसूचना के अनुसार जिले के 28 वैसे विद्यालय जो भूमिहीन हैं या झोपड़ी में चल रहे हैं को दूसरे विद्यालय में समाहित किया गया है. इसमें वैसे स्कूलों को पहले फेज में लिया गया है जिनकी दूरी स्थापित विद्यालयों से आधा किलो मीटर की दूरी पर हो. लेकिन इस विद्यालय को पोषक क्षेत्र से ही लगभग ढाई किलोमीटर दूर भेज दिया गया है. ऐसे में विभाग भी परेशान है कि इस विद्यालय को किस विद्यालय में समाहित किया जाये. िवभाग की परेशानी के कारण इस स्कूल के छात्र भी परेशान हैं.
पोषक क्षेत्र के बच्चे नहीं हो रहे लाभांवित
स्थापना काल में यह विद्यालय भगत टोला के बच्चों के हित को ध्यान में रखते हुए खोला गया था. लेकिन उस समय प्रशासन ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि उस विद्यालय को भवन भी चाहिए और भवन निर्माण के लिए भूमि की आवश्यकता होगी. बाद के दिनों में जब विद्यालय को भूमि उपलब्ध नहीं हुआ तो यत्र-तत्र विद्यालय चलता रहा. अब तक यह विद्यालय चार स्थानों पर स्थानांतरित हो गया है. विद्यालय खोले जाने का मुख्य उद्देश्य था कि इस विद्यालय के पोषक क्षेत्र के बच्चों को लाभ मिले जो नहीं हो पा रहा है.
अररिया : यह विद्यालय रानीगंज रोड में कोल्ड स्टोरेज के समीप स्थित प्राथमिक विद्यालय रहिका टोला दक्षिण के परिसर में बने आंबेडकर भवन में संचालित हो रहा है. भूमिहीन होने कारण इस विद्यालय को अपना कोई भवन नहीं है. इस विद्यालय में शिवपूरी व ओमनगर पश्चिमी भाग के बच्चे नामांकित हैं. इस विद्यालय में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई होती है. जहां कुल 122 बच्चे नामांकित हैं. इसमें कुल पांच शिक्षक पदस्थापित हैं.
अपनी जमीन व भवन नहीं होने के कारण यह स्कूल 42 वर्ष में भी मध्य विद्यालय में उत्क्रमित नहीं हो पाया.
वर्ष 1975 में हुई थी विद्यालय की स्थापना: प्राथमिक विद्यालय भगत टोला की स्थापना वर्ष 1975 में भगत टोला में हुई थी. चूंकि इस विद्यालय को उस समय तुरंत भूमि नहीं मिल पाया तो यह विद्यालय माता स्थान परिसर में शुरू किया गया.
जो 1987 तक माता स्थान में चला. लेकिन दुर्भाग्य वश 1987 में शहर में आयी बाढ़ के कारण बाढ़ प्रभावितों को रहने के लिए विद्यालय को वहां से हटा दिया गया. इसके बाद विद्यालय कुछ दिनों तक किसी किसी के दरवाजे पर चलता रहा. 1988 में इस विद्यालय को आदर्श मवि अररिया बाजार में
स्थानांतरित कर दिया गया. लेकिन बाजार मवि में छात्रों की तुलना में कमरों की संख्या कम होने के कारण वहां के प्रधानाध्यापक के अनुरोध पर भगत टोला प्राथमिक विद्यालय को 1998 के जनवरी में हटाते हुए मवि ककुड़वा में स्थानांतरित कर दिया गया. लेकिन मवि ककोड़वा में भी बच्चों की संख्या व कमरों की कमी के परेशानी होने लगी. इसके बाद मवि ककोड़वा के तत्कालीन प्रधानाध्यापक के अनुरोध पर इस विद्यालय को केवल दस महीने बाद वर्ष 1998 के अक्तूबर माह में वर्तमान स्थान पर स्थित आंबेडकर भवन में स्थानांतरित कर दिया गया. जहां आज भी यह विद्यालय संचालित है.
आंबेडकर भवन में केवल दो कमरे हैं. इन दो कमरों में पांचवीं तक की कक्षा चलती है. जहां पांच शिक्षक अलग-अलग कक्षाओं के छात्रों को पढ़ाते हैं. कमरों के अभाव में बच्चे पेड़ के नीचे पढ़ते हैं. जो गुरुकुल की याद दिलाता है.
अब तक चार जगह पर स्थानांतरित हो चुका है प्राथमिक विद्यालय भगत टोला

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