दिघलबैंक : धनगढ़ा के निर्वाचित मुखिया पर अपराधियों द्वारा किये गये जानलेवा हमला तो एक बानगी भर है. बीते कुछ वर्षो में नेपाल की सीमा से सटे दिघलबैंक प्रखंड में आपराधिक वारदातों में लगातार इजाफा हुआ है.और दूसरे जिले के अलावे दूसरे प्रदेश के अपराधियों की सक्रियता बढ़ी है. गत वर्ष तुलसिया दक्षिण बस्ती में आठ माह के भीतर एक ही परिवार में लगातार दूसरी बार भीषण डकैती का प्रयास किया गया था. जिसमे दो दर्जन से भी अधिक की संख्या में अपराधियों ने लूट का प्रयास किया था लेकिन गृह स्वामी और पुलिस की सक्रियता से अपराधियों के मंसूबों पर पानी फिर गया था.
दोनों तरफ से गोलीबारी भी हुई थी तत्कालीन पुलिस अधीक्षक राजीव रंजन ने भी बाहरी अपराधियों की संलिप्ता को स्वीकारा था. इसके अलावे पश्चिम बंगाल के चोपड़ा से अपहरण किये गए कारोबारी रथीन मजूमदार के अपहरण के बाद अपराधियों ने घटना में प्रयोग किये गए तवेरा कार के साथ दिघलबैंक के नया बाड़ी गांव में आपराधिक वारदात को अंजाम देने के फिराक में थे. लेकिन एसएसबी और दिघलबैंक पुलिस तत्परता की के कारण अपराधी वाहन छोड़ नेपाल की सीमा में जा घुसे थे.वहीं धनतोला एसबीआई कि शाखा से राशि निकालकर लौटने के क्रम में भी अपराधियों ने छिनतई की घटना को अंजाम दिया था. जबकि मुखिया हारू लाल राम की हत्या के प्रयास में भी बाहरी अपराधियों के शामिल होने के कयास लग रहे है. तीन अपराधी आये दो ने मुखिया को जगाया और एक अपराधी मोटरसाइकिल स्टार्ट कर उसी पर जमा रहा. काम पूरा होते ही तीनों रफूचक्कर हो गया.
