नप बोर्ड ने अगस्त 2016 में ही बनाया था कानून, लेकिन नहीं हुआ इसका प्रतिपालन
नप क्षेत्र में प्रतिदिन एक क्विंटल प्लास्टिक वेस्ट होता है जमा, जो बन रहा है बीमारियों का खजाना
प्लास्टिक थैलों पर रोक लगाकर एसएचजी ग्रुप के महिलाओं को कागज के थैला बनाने के लिए किया जा सकता था प्रोत्साहित
अररिया : नगर निकाय चुनाव अपने परवान पर है. नये नगर सरकार के गठन को लेकर उम्मीदवार अपने वायदों की पोटली लेकर नगरवासियों के पास पहुंच रहे हैं.
साथ ही शहर में रह रहे बुद्धिजीवियों के बीच यह चर्चा भी हो रही है कि वोट लेकर जनता के पास किये गये वायदों को जन प्रतिनिधि कहां पूरा कर पाते हैं. खास कर पर्यावरण के दृष्टिकोण से उनकी आने वाली पीढ़ी के लिए वे प्रदूषित वातावरण की सौगात छोड़ कर जा रहे हैं. उनकी माने तो नप बोर्ड द्वारा पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए प्रस्ताव तो लेते हैं. लेकिन अधिकांश प्रस्ताव फाइलों में बंद होकर ही रह जाते हैं. उन्हें जमीन पर उतारने का प्रयास तक किया जाता नहीं हैं.
इनमें से उनकी माने तो प्लास्टिक बेस्ट मेजेनमेंट सेल्स 2016 के कंडिका छह के अनुसार नगर निकाय क्षेत्र में 50 माइक्रोन से कम मोटाई के प्लास्टिक उत्पादन, संग्रहण, वितरण व भंडारण पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश को लेकर 22 अगस्त 2016 को ही नप बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव संख्या दो लेकर नप क्षेत्र में प्लास्टिक बैग पर एक सितंबर 2016 से ही प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया था. निर्णय में यह भी शामिल था कि प्लास्टिक पदार्थ का इस्तेमाल करने वाले दुकानदारों पर पांच सौ रुपये का जुर्माना लगाया जायेगा.
प्रस्ताव लिये जाने के बाद भी पर्यावरण के दृष्टिकोण से मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक प्लास्टिक पदार्थों पर अगर रोक लग पाती तो इससे नगर वासियों को तो फायदा होता ही इसके अलावा एनएयूएलएम के तहत कार्य कर रहे एसएचजी ग्रुप की महिलाओं के लिए भी स्वरोजगार के अवसर खुलते.
