विभागीय उदासीनता. सालों तक होती है जांच, कैसे हो अपराधियों पर कानून का खौफ
किसी घटना के बाद प्रशासनिक हलचल बढ़ जाती है. प्राथमिकी दर्ज होती है, आनन-फानन में दो-चार गिरफ्तारी भी होती है, लेकिन तनाव कम होते ही कानून के रखवाले चैन की सांस लेकर शिथिल पड़ जाते हैं.
अररिया : जब घटना घटती है तो अफरा-तफरी का माहौल होता है. प्रशासनिक हलचल बढ़ जाती है. थाना में प्राथमिकी दर्ज भी होती है. आनन-फानन में दो-चार गिरफ्तारी भी होती है. लेकिन तनाव कम होते ही कानून के रखवाले जवाबदेह चैन की सांस लेकर मानो शिथिल पड़ जाते हैं. पिछले तीन माह में घटी वारदातों को लेकर कार्रवाई में जो तेजगति होनी चाहिए. वह नजर नहीं आती है.
केस स्टडी-एक
बीते 25 दिसंबर 2016 को रानीगंज थाना क्षेत्र के परमानंदपुर में कथित भू-विवाद को लेकर दो समुदाय के बीच हिंसक झड़प हुई थी. जिसमें एक की मौत हो गयी थी.
घटना के बाद प्रशासन सजगता के साथ स्थिति पर काबू पाया. महादलितों के घर में आग लगाने की बात सामने आयी. दोनों पक्षों की ओर से हत्या व अगजनी को लेकर प्राथमिकी दर्ज की गयी. गांव में दंडाधिकारी के साथ पुलिस जवानों की तैनाती भी की गयी. पुलिस आनन-फानन तीन लोगों की गिरफ्तारी भी की. समय के साथ गांव का वातावरण शांत हुआ. गांव से पुलिस हटा ली गयी है. लेकिन कानून को हाथ में लेने वाले कथित नामजद आज भी छुट्टा घूम रहे हैं. आखिर कानून का खौफ ऐसे लोगों पर कैसे हो. इस बीच पर्यवेक्षण का खेल चलता रहता है.
कहते हैं एसपी
इन मामलों पर पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार पोरिका कहते हैं कि कार्रवाई में शिथिलता की बात गलत है. पुलिस कार्रवाई कर रही है. मामले के अभियुक्तों को गिरफ्तार किया जा रहा है. हत्या जैसे मामलों में कोई निर्दोष फस नहीं जाय. इसका भी ख्याल रखा जा रहा है. रहड़िया हत्याकांड हो या फिर परमानंदपुर की घटना हो. पुलिस पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रही है. एसपी ने कहा कि बम-हथियार बरामदगी का मामला हो या फिर दंपती मोहन झा-शकुंतला देवी हत्याकांड हो. पुलिस अपराधियों-हत्यारों के चेहरे पर पड़े पर्दे को हटा कर ही चैन लेगी. लोगों को भरोसा रखना चाहिए.
केस स्टडी-दो
मुख्यमंत्री के निश्चय यात्रा से तीन दिन पूर्व चार दिसंबर की रात शहर के ओमनगर में एक आवासीय परिसर से जिंदा बम व थ्रीनट, गोली की बरामदगी पुलिस ने किया था. मामले को लेकर थाना में कांड दर्ज किया गया. अहम यह कि बम रखे जाने की सूचना भी मोबाइल से पुलिस-पत्रकारों को दी गयी थी. पुलिस अनुसंधान में जुटी. 17 फरवरी को मामले का एक अप्राथमिकी अभियुक्त गिरफ्तार हुआ. उसने स्वीकारोक्ति बयान में बम, थ्रीनट रखने की पूरी जस्तान बयां किया. लेकिन अब तक अन्य किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पायी है. उसका भी नहीं हुआ गिरफ्तारी, जिसने मोबाइल से बम रखने की सूचना दिया था. आखिर ऐसे घटना में शामिल अपराधियों की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हो पायी है.
केस स्टडी-तीन
जब लोग नये साल के जश्न मना रहे थे. उसी पहली जनवरी को भरगामा थाना क्षेत्र के रहड़िया गांव में भू-विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच तनाव पैदा हो गया. हमलावरों ने दो लोगों को पीट-पीट कर हत्या कर दिया. कांड दर्ज हुए. मामले को ले वामपंथी नेताओं का दौरा हुआ. 28 फरवरी को जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित कर मानो पुलिस के विरुद्ध चार्चसीट दाखिल किया गया. मामले में अब तक आधा दर्जन की गिरफ्तारी हुई. इसमें कथित तौर पर मुख्य अभियुक्त गण अब भी फरार है. मामले में पुलिस कार्रवाई में शिथिलता को ले क्षेत्र में चर्चा है. आखिर पुलिस कार्रवाई क्यों शिथिल पड़ गयी. कैसे हो ऐसे तत्वों पर कानून का भय.
केस स्टडी-चार, अंधेरे में तीर चला रही है पुलिस
बीते 21 जनवरी के अहले सुबह हड़ियाबारा के समीप एक जंगल में एक दंपती की गला रेत कर हत्या कर दी गयी. घटना जघन्य था. दंपती की पहचान भी हुई. पोस्टमार्टम बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया. पुलिस ने त्वरित तौर पर दो लोगों से पूछताछ भी की, लेकिन इस मामले में भी पुलिस हत्यारे के गर्दन पर हाथ नहीं डाल पायी है. पुलिस अंधेरे में तीर चला रही है. एक पखवाड़ा लगने को है. शायद पुलिस साक्ष्य जुटाने में जुटी हो. घटनाक्रम पर पड़ी पर्दे को बेपर्दा कब तक कर पायेगी पुलिस.
पुलिस पूरी पारदर्शिता के साथ कर रही काम हत्यारों की गिरफ्तारी होगी : एसपी
