कहां गयी लाखों की राशि

रोजगार सृजन . प्रशिक्षण देने वाली संस्था को नहीं हुआ भुगतान स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार सृजन के तहत 2012 में छह संस्थाओं द्वारा प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण देने वाली संस्था को नगर परिषद द्वारा अब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया है. अररिया : स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार सृजन योजना के तहत वर्ष […]

रोजगार सृजन . प्रशिक्षण देने वाली संस्था को नहीं हुआ भुगतान

स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार सृजन के तहत 2012 में छह संस्थाओं द्वारा प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण देने वाली संस्था को नगर परिषद द्वारा अब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया है.
अररिया : स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार सृजन योजना के तहत वर्ष 2012 में विभिन्न प्रकार के छह ट्रेडों में छह संस्थाओं द्वारा दिये गये प्रशिक्षण के नाम पर लाखों रुपये के घालमेल का मामला सामने आ रहा है. प्रशिक्षण में शामिल छह संस्थाओं में से एक ग्रामीण बाल एवं मानव विकास समिति के सचिव ने प्रशिक्षण पूरा करने के बाद भी नगर परिषद द्वारा उनके संस्था को बकाया राशि के भुगतान नहीं करने का आरोप लगाया है. उनके संस्था ने प्रशिक्षण दिया, जिनका साक्ष्य उनके पास मौजूद है,
जिसमें तत्कालीन कार्यपालक पदाधिकारी समेत मुख्य पार्षद स्वीटी दास गुप्ता, उप मुख्य पार्षद, टैक्स दारोगा व अन्य नगर पार्षदों के हस्ताक्षर हैं, जिसके एवज में अग्रिम के रूप में दो किस्तों में 12 लाख रुपये का भुगतान भी संस्था को किया गया था. ऐसे में संस्थाओं द्वारा दिये गये प्रशिक्षण से संबंधित दस्तावेजों को आरटीआइ आवेदनकर्ता राम विनय राय को उपलब्ध नहीं कराया जाना समझ से परे है. यह बात आरटीआइ आवेदनकर्ता राम विनय राय को नप द्वारा उपलब्ध कराये गये जवाब से स्पष्ट होता है जिसमें नगर परिषद प्रशिक्षण संबंधित दस्तावेजों में प्रशिक्षुओं की संख्या 2250 के अलावा कुल व्यय राशि व खर्च के उपरांत संस्था द्वारा विपत्र जमा करने या नहीं करने की भी जानकारी उपलब्ध नहीं करा पा रहा है. ऐसी स्थिति में प्रशिक्षण के नाम पर खर्च की गयी लाखों रुपये की राशि कहां और किसके पास गयी या फिर जिम्मेवार अधिकारी व प्रतिनिधियों पर कार्रवाई नहीं किया जाना, प्रशासनिक शिथिलता की कलई खोल रही है.
प्रभात पड़ताल के क्रम में इन बातों का खुलासा हो रहा है कि वर्ष 2012 में रोजगार सृजन योजना के तहत वर्ष 2012 में संस्था कृषि एजुकेशनल एंड हेल्थ सेवा संस्थान, इंफोसिस्टम एंड सोल्यूशन, उजमा महिला विकास समिति, ग्रामीण बाल विकास समिति, श्रीराम न्यू होराइजन्स व संबोधित संस्था द्वारा विभिन्न ट्रेड में को 2250 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया. दिये गये प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षुओं को ड्राइविंग, सिलाई-कढ़ाई, सुरक्षा गार्ड, ब्यूटीशियन, कंप्यूटर आदि शामिल हैं. लेकिन प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा हुआ या नहीं से संबंधित जानकारी नगर परिषद के पास वर्तमान समय में उपलब्ध नहीं हो पाना सरकारी राशि के किये गये व्यय के लेखा-जोखा पर भी सवालिया निशान खड़ा कर रहा है. ऐसी परिस्थिति में ग्रामीण बाल एवं मानव विकास समिति द्वारा प्रशिक्षण दिये जाने के साक्ष्य उपलब्ध कराये जाने व लगभग साढ़े 68 लाख रुपये के बकाये के भुगतान की मांग ने एक बार फिर पांच वर्ष पुराने घालमेल को कुरेदने का काम किया है. अगर गहराई से जांच हो तो कई बाबुओं व प्रतिनिधियों की गरदन फंसने के आसार नजर आ रहे हैं, क्योंकि एक संस्था को दो किस्तों में 12 लाख का अग्रिम भुगतान किया जाता है. उसके प्रशिक्षण कार्यक्रम को क्लीन चिट भी दे दिया जाता है. फिर प्रशिक्षण के नाम पर उनके द्वारा लाखों रुपये की राशि का बकाया भी नप पर दिखाया जा रहा है. लेकिन संपूर्ण दस्तावेज या व्यय का लेखा-जोखा नप कार्यालय में नहीं है, तो आखिर वे फाइल कहां गये.
आरोप निराधार व असत्य
ग्रामीण बाल एवं मानव विकास समिति के सचिव अरुण यादव ने पूछने पर बताया कि वर्ष 2012 में उनकी संस्था द्वारा कुल 129 प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया. तीन दिसंबर 2012 को नप के सशक्त स्थायी समिति द्वारा पहले दस लाख का व फिर 09 अक्तूबर 2012 को दो लाख रुपये का अग्रिम दिया गया. प्रशिक्षण कार्य पूरा करने के बाद भी अब तक उनके 68,81,175 रुपये का भुगतान लंबित रखा गया है. जबकि इसके कारण वे गंभीर आर्थिक समस्याओं के दौर से गुजर रहे हैं. इसके अलावा उनके ऊपर प्रशिक्षण पूरा नहीं करने का आरोप लगाया जा रहा है, जो निराधार व असत्य है.
नहीं की गयी है भुगतान की मांग
कार्यपालक पदाधिकारी भवेश कुमार ने बताया कि किसी भी संस्था द्वारा पिछले डेढ़ वर्षों में किसी भी प्रकार के लंबित भुगतान का अनुरोध कार्यालय से नहीं किया गया है.
संस्था कह रही है पांच वर्ष बाद भी नहीं हो पाया है साढ़े 68 लाख रुपये का भुगतान
अगर भुगतान हुआ तो आरटीआइ आवेदनकर्ता को नप क्यों नहीं दे पाया प्रशिक्षण मद में व्यय की गयी राशि का ब्योरा

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