चिकनी सड़कें हो रही हैं रक्तरंजित

जानकारी . यातायात िनयमों का जिले में नहीं हो रहा है अनुपालन पांच वर्षों में लगभग 321 लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है. हाइवे को छोड़ जिले की अन्य सड़कों पर सड़क सांकेतिक का दिख रहा है अभाव अररिया : चमचमाती सड़क लोगों के आवगामन को सुगम बनाने के लिए तैयार किये […]

जानकारी . यातायात िनयमों का जिले में नहीं हो रहा है अनुपालन

पांच वर्षों में लगभग 321 लोगों की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है. हाइवे को छोड़ जिले की अन्य सड़कों पर सड़क सांकेतिक का दिख रहा है अभाव
अररिया : चमचमाती सड़क लोगों के आवगामन को सुगम बनाने के लिए तैयार किये जाते हैं. लेकिन यें सड़कें मौत को आमंत्रण दे रही हैं. सड़क सुरक्षा को ले जितने भी अभियान चलाये जा रहे हों, लेकिन सड़कों पर दौड़ती तेज रफ्तार वाहनों पर कहां किसी का लगाम है. देखा जाए तो सड़कों पर यातायात नियमों की अनदेखी हो रही है. अररिया समेत सीमांचल की इन सड़कों पर चल रही कातिल वाहनें हर माह पांच लोगों की जिंदगी को खामोश कर रही है. सड़क दुर्घटना में घायल लोग अगर अपना उपचार करा भी ले रहे हैं तब भी सैकड़ों लोग अपाहिज बनने को मजबूर हो रहे हैं. प्राप्त आंकड़ों के अनुसार पांच वर्षों में अब तक 323 लोगों की मौत सड़क पर दौड़ने वाली तेज रफ्तार वाहनों की चपेट में आने से असमय हो चुकी है. यदि प्रति वर्ष के आंकड़ों पर गौर करें तो औसतन 65 से 70 मौत हुई हैं, जबकि घायलों की संख्या प्रति वर्ष औसतन पांच हजार के लगभग है.
बेलगाम ऑटो दे रहे दुर्घटना को आमंत्रण
जिले में तीनपहिया वाहनों पर भी लगाम लगा पाना परिवहन विभाग के लिए खुली चुनौती साबित हो रही है. इसका एक कारण है जिले में बेतरतीब बढ़ती जा रही ऑटो की संख्या. ऑटो चालकों की मनमानी का आलम यह है कि शहर में जाम की समस्या से लेकर दुर्घटनाओं को आमंत्रित करती है. सदर अस्पताल अररिया में प्रतिदिन आधा दर्जन घायल इलाज के लिए पहुंचते हैं, जिसमें अधिकांश घटना ऑटो से होने की बात सामने आती है.
यातायात नियमों की सही जानकारी नहीं होना भी बन रहा है दुर्घटना का कारण : मोटरगाड़ी अधिनियम 1998 की विभिन्न धाराओं के तहत यातायात नियंत्रिण के लिए कई प्रावधान निर्धारित किये गये हैं. इसके लिए धारा 180 से लेकर धारा 190 तक के धाराओं के तहत दंड का प्रावधान है. देखा जाए तो परिवहन विभाग इन धाराओं का प्रयोग केवल विभागीय लक्ष्यों की पूर्ति करने तक के लिए ही करती है. परिणाम वाहनों के चाल पर ब्रेक नहीं लग पा रहा है. जो दुर्घटना को आमंत्रित कर रहा है.
राष्ट्रीय राजमार्ग एवं एसएच पथ दुर्घटनाओं में खासी इजाफा हो रहा है. वर्ष 2016 के दिसंबर माह तक अररिया जिले में लगभग 50 लोगों की मौत सड़क पर चलने वाली कातिल वाहनों के अनियंत्रित रफ्तार के कारण हुई है. इनमें अररिया से रानीगंत एनएच 327 ई, एनएच 57 पर फारबिसगंज-नरपतगंज व अररिया-फारबिसगंज पर हुई हैं. अररिया- कुर्साकांटा मार्ग पर हाल के दिनों में दो, कुर्सकांटा-फारबिसगंज डोमरा सड़क पर दिसंबर व जनवरी माह में दो, सिकटी-कुर्सकांटा में जनवरी माह में एक, अररिया रानीगंज एनएच 327 ई पर रजोखर के समीप हुई दो मौतें तो ताजातरीन हैं. ज्यादातर मौत ट्रक की चपेट में आने से हुई हैं. यह दीगर बात है कि पैदल चलने वाले लोग भी दुर्घटना के शिकार हुए हैं. लेकिन बाइक पर दौड़ती जिंदगी ने कितने घरों की रोशनी को पलक झपकते ही बुझा दिया है.
वाहन चलाते समय मोबाइल पर न करें बात
सड़कों पर सुरक्षा के लिए समय-समय पर अभियान चलाया जाता है. अभी हाल ही में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया गया था. लेकिन लोगों को चाहिए कि वे सड़कों पर वाहन चलाते समय मोबाइल से बात न करें और अपना ध्यान एकाग्रचित रखें. सावधानी ही बचाव है.
मनोज कुमार शाही, जिला परिवहन पदाधिकारी, अररिया
विगत पांच वर्षों में सड़क दुर्घटना में हुई मौत
वर्ष 2012 73
वर्ष 2013 67
वर्ष 2014 69
वर्ष 2015 62
वर्ष 2016 45
वर्ष 2017 10 अब तक
आंकड़ों पर गौर करें तो प्रतिवर्ष औसतन 65 से 70 लोगों की मौत हुई है

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >