मिलरों द्वारा दर्शाये गये क्षमता से कम क्षमता होने पर होगी कार्रवाई
धान अधिप्राप्ति करने वाले मिलर से मिलिंग करा कर चावल लेगी एसएफसी
अररिया : मिलरों के साथ टैगिंग की प्रक्रिया से पहले मिलरों का भौतिक सत्यापन जरूरी है. वर्तमान डीएम एसएफसी द्वारा मिलरों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है, जिससे कम क्षमता व मापदंड को धत्ता बता कर चावल खरीद कर पैक्सों को उपलब्ध कराने वाले राइस मिलरों पर गाज गिर सकती है. ऐसे में पिछले वर्ष चावल के लिए इंतजार करने वाले पैक्स व व्यापार मंडल को सही मिलरों के साथ टैग करने की समस्या से भी निजात मिल पायेगा. कागजी घोड़े पर मिलिंग क्षमता दिखाने वाले राइस मिलर के विरुद्ध कार्रवाई की तलवार भी चल सकती है. खैर भौतिक सत्यापन के बाद ही सही और गलत मिलरों का सच सामने आ पायेगा.
मिलिंग क्षमता की जांच जरूरी
आंकड़ों पर अगर गौर किया जाये तो वित्तीय वर्ष 2014-15 में जहां मात्र 2019 किसानों से लगभग पौने तीन लाख क्विंटल से अधिक की धान की अधिप्राप्ति हुई वहीं वित्तीय वर्ष में पांच हजार किसानों से सवा दो लाख क्विंटल ही धान की खरीद हो पायी. पिछले आंकड़ों व पैक्स अध्यक्षों की बातों पर गौर किया जाये तो, उन्हें धान देने के बाद मिलर से चावल लेने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ा. कारण स्पष्ट था कि मिलरों द्वारा क्षमता से ज्यादा पैक्सों के साथ टैगिंग की प्रक्रिया की गयी थी. अधिकांश मिलरों द्वारा धान के एवज में दोयम दर्जे के चावल को एसएफसी को उपलब्ध कराया गया. सूत्रों की माने तो मिलरों को दोतरफा लाभ हुआ. पहला तो पैक्सों से प्रति क्विंटल आठ से दस किलो धान की आमद दूसरी धान बेच कर उससे कम कीमत में चावल की आपूर्ति आसानी से हो गयी. ऐसे में यह जांच किया जाना जरूरी है कि निबंधित कराये गये मिलरों के पास उसके क्षमता के हिसाब से मिलिंग क्षमता है भी या नहीं.
कहते हैं डीएम एसएफसी
इधर इस संबंध में डीएम एसएफसी बिरेंद्र नाथ गुप्ता ने बताया कि 22 मिलरों द्वारा एसएफसी को आवश्यक दस्तावेज देकर निबंधित कराया गया है. अब उनके कागजों में उल्लेखित बिंदुओं का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि ज्यादा क्षमता दिखा कर दस्तावेज पूरा करने वाले मिलरों पर होगी कार्रवाई.
