महिला उत्पीड़न पर बनायेंगी फिल्म

बंध्याकरण के नाम पर हो रहे महिला उत्पीड़न पर अमेरिका की जोई हेमिल्टन फिल्म बना रही हैं. वर्ष 2012 के सात जनवरी को आदर्श मध्य विद्यालय में देर रात 53 महिलाओं का स्कूल के बेंच पर लिटा कर किया गया था ऑपरेशन. मृगेंद्र मणी अररिया : परिवार नियोजन के विभिन्न सेवाओं में मानवीय मूल्यों को […]

बंध्याकरण के नाम पर हो रहे महिला उत्पीड़न पर अमेरिका की जोई हेमिल्टन फिल्म बना रही हैं. वर्ष 2012 के सात जनवरी को आदर्श मध्य विद्यालय में देर रात 53 महिलाओं का स्कूल के बेंच पर लिटा कर किया गया था ऑपरेशन.
मृगेंद्र मणी
अररिया : परिवार नियोजन के विभिन्न सेवाओं में मानवीय मूल्यों को ताक पर सिर्फ सांख्यिकीय रूप में देखने वाले संस्था या जवाबदेह लोगों के विरुद्ध कार्रवाई हो, इस पर अमेरिका निवासी जोई हेम्लिटन व एनी की जोड़ी एक फिल्म बनाने जा रही है.
फिल्म में विभिन्न देशों व भारत में हुए परिवार नियोजन शिविरों को केंद्रित किया गया है. इसी क्रम में पिछले सोमवार दो जनवरी को दिल्ली से अमेरिका निवासी व गॉट ट्री प्रोडेक्शन की निर्माता व निदेशक जोई हेम्लटन, एनी सामाजिक कार्यकर्ता सह विश्व स्वास्थ्य मंच से जुड़ी देविका विश्वास के साथ अररिया जिले के कपरफोरा गांव पहुंची. यहां पहुंच कर उन्होंने वर्ष 2012 के सात जनवरी को आदर्श मध्य विद्यालय कपरफोरा में देर रात एनजीओ जय मां अंबे वेलफेयर द्वारा किये गये 53 महिलाओं के बंध्याकरण में हुई अनियमितता की जानकारी ली. साथ ही अनियमितता की शिकार हुई पीड़िता से मिलकर उनके तत्कालीन अनुभव का फिल्मांकन भी किया.
इस क्रम में विदेशी निर्माता निदेशक उस घटना के गवाह वर्तमान उप प्रमुख विजय कुमार सिंह के आवास पर भी पहुंचे. लगातार चार दिनों तक टीम के सभी सदस्य कपरफोरा का दौरा करते रहे. इन्होंने विभिन्न बिंदुओं पर पीड़िता से मिल कर उनसे गहन पूछताछ भी की, जिसमें संबंधित एनजीओं के विरुद्ध हुई कार्रवाई व उसके बाद अब तक नहीं मिला मुआवजा भी शामिल है.
सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई थी जनहित याचिका : इस अमानवीय कृत के विरुद्ध सामाजिक कार्यकर्ता देविका विश्वास ने नयी दिल्ली में समाचार पत्रों के माध्यम से जानकारी प्राप्त कर 08 फरवरी को लंदन के टाइम्स मैगजीन के पत्रकार फ्रांसिस एलिएट व उनकी टीम के साथ कपरफोरा पहुंची थी. इसके बाद मामले का उजागर विदेशों में भी हुआ था. हालांकि देविका विश्वास ने वादी बनते हुए भारत सरकार एवं अन्य प्रतिवादी के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में नागरिक मूल अधिकार क्षेत्र रिट पिटिसन सिविल संख्या 95 वर्ष 2012 दायर किया.
इस जनहित याचिका के बाद बकौल देविका विश्वास की माने तो 17 अप्रैल 2015 को एक सुनवाई के पश्चात भारत सरकार को यह निर्देशित किया गया कि राज्य व संघशासित प्रदेशों के अपना साथी संस्थानों के साथ बैठक कर एक समेकित कारगर सभी स्कीमों का निष्पादन योजना बनायें जो नसंबदी या फैमिली प्लानिंग इनडेमनिटी स्कीम 2013 तथा रमाकांत की याचिका से जुड़े निर्देशों का प्रतिपालन संबंधित हो. हालांकि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश में देर रात बंध्याकरण नहीं करने जैसे भी निर्णय शामिल होने की बात देविका विश्वास द्वारा बताया गया है.
जारी रहेगी लड़ाई : इधर इंस संबंध में दूरभाष पर संपर्क के बाद देविका विश्वास ने बताया कि उनका लक्ष्य है कि एनजीओ की लापरवाही व सरकार की अनदेखी के कारण जो परेशानी कपरफोरा में परिवार नियोजन के दौरान महिलाओं को हुई है, उन्हें सरकारी स्तर पर मुआवजा उपलब्ध कराया जाये. साथ ही जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाये. वे तब तक अपनी लड़ाई को जारी रखेंगी.
कपरफोरा आदर्श मध्य विद्यालय के विभिन्न कमरों में आस-पास के गांवों के लगभग 53 महिलाओं को स्कूल की बेंच पर लिटा कर देर रात एनजीओ के निजी चिकित्सक द्वारा बंध्याकरण किया गया था.
ऑपरेशन के बाद चिकित्सक चले गये. इस बीच पहुंसी निवासी रेखा देवी, पति सूर्यानंद सिंह को अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा. परिजनों द्वारा कई बार शिकायत करने के बाद भी एनजीओ के सदस्यों द्वारा कोई सकारात्मक पहल नहीं की गयी. अंतत: रेखा देवी के रिश्तेदार व सामाजिक कार्यकर्ता विजय कुमार सिंह की पहल पर तत्कालीन एसपी शिवदीप लांडे ने कपरफोरा पहुंच कर मामले में न केवल संज्ञान लिया. बल्कि एक्सपायरी दवा के प्रयोग का भी भंडाफोड़ किया था. इस मामले में एनजीओ व संबंधित जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध आठ जनवरी 2012 को कांड संख्या 135, 136, 137 व 144/12 के तहत मामला दर्ज किया गया था.

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