अररिया : जिला सद्भावना मंच के बैनर तले 21 अगस्त से चल रहे जमाते इसलामी, हिंद के कार्यक्रम शांति व मानवता अभियान का समापन रविवार को हो गया. इस मौके पर टाउन हॉल में आयोजित समापन समारोह की विशेषता ये रही कि विभिन्न धर्मों के धर्म गुरुओं ने एक मंच साझा कर शांति व मानवता कायम करने की अपील की. समारोह की अध्यक्षता एलएन मिथिला विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डा जफर हबीब ने की. संचालन प्रो एहतेशामुल हसन ने किया.
मन के अंदर जागृत करें सद्भावना मंच पर उपस्थित विभिन्न धर्मों के गुरु.
अररिया : जिला सद्भावना मंच के बैनर तले 21 अगस्त से चल रहे जमाते इसलामी, हिंद के कार्यक्रम शांति व मानवता अभियान का समापन रविवार को हो गया. इस मौके पर टाउन हॉल में आयोजित समापन समारोह की विशेषता ये रही कि विभिन्न धर्मों के धर्म गुरुओं ने एक मंच साझा कर शांति व मानवता […]

खास ये रहा कि ने केवल विभिन्न धर्म गुरुओं ने मंच साझा किया. बल्कि कार्यक्रम की शुरूआत में कुरआन की आयतें पढ़ी गयीं, तो गीता का पाठ भी हुआ. देश के विकास के लिए अमन व शांति को जरूरी करार देते हुए अतिथि वक्ताओं ने कहा कि विविधता में एकता देश की पहचान है. इसे कायम रखना जरूरी है. न्याय का गला घोंटा गया तो अशांति फैलेगी. संविधन के तहत सबको अवसर मिलना चाहिए. सबों का विकास होना चाहिए.
वक्ताओं ने अलग अलग धर्मों के ग्रंथों का हवाला देते हुए कहा कि अमन व शांति के लिए हर व्यक्ति को पहल करनी होगी. मन के अंदर सद्भावना को जागृत करना होगा. विषय प्रवेश करते हुए जमाते इसलामी के मो मोहसिन ने कहा कि न्याय का दामन नहीं छूटना चाहिए. महिला अधिकारों के हनन को भी रोकना होगा. महिलाएं कमजोर होंगी तो समाज बिगड़ेगा.
जीरोमाइल मदरसा के मुफ्ती अलीमुद्दीन ने कहा कि दौलत व कुरसी की लालच बहुत सारी बुराइयों की जड़ हैं. लोग झूठ बोलना छोड़ दें. शांति कायम हो जायेगी. जीवन का हर कदम सुधारात्मक होना चाहिए. उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या को केवल इंसान बनकर देखना चाहिए. धर्म व जाति के नजरिया से नहीं. उन्होंने मीडिया को भी सकारात्मक व प्रेरक खबरों पर तवज्जो देने की सलाह भी दी.
वहीं सतसंग समिति के अध्यक्ष डा श्याम लाल यादव ने कहा कि इश्वर की आराधना व तपस्या लोग शांति के लिए ही करते हैं. देश के संविधान की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि सबों को अवसर मिला चाहिए. हर देश वासी को चाहिए कि वे एक दूसरे की हिफाजत करे. धार्मिक सहनशीलता बहुत जरूरी है. समाज में टकराव नहीं,
अमन की जरूरत है. किसी को भी मनमानी का अधिकार नहीं है. प्यार व संयम के बल पर ही समाज का निर्माण होना चाहिए.ब्रह्मा कुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय अररिया आरएस सेंटर की जिला संचालिका बीके उर्मिला बहन ने मन के भीतर सद्भावना जागृत करने का आह्वान करते हुए कहा कि मन के अंदर की दुर्भावना व घृणा का इलाज करना होगा. आपस में दिल से मुहब्बत करनी होगी.
उन्होंने कहा कि विविधता में एकता देश की पहचान है. इसे बनाये रखना होगा. उन्होंने मन को शुद्ध करने व ध्यान पर भी बल दिया. जबकि जैन धर्मावलंबी मुनीश्री कमल कुमार जी स्वामी ने कहा कि केवल आकृति संवारने से कुछ नहीं होगा. आचरण को अच्छा बनाने की जरूरत है. दिखने में अलग होने के बावजूद सभी मनुष्य एक हैं. लिहाजा मनुष्यता की भावना भी होनी चाहिए. दूसरी तरफ अध्यक्षीय संबोधन में डा हबीब ने कहा कि अनेकता में एकता ही असली भारत है. देश की तरक्की के लिए इंसानियत का परचम बुलंद करना होगा.
उन्होंने इंसानों को अपनी हैसियत से वाकिफ होने की सलाह देते हुए कहा कि खुद को इश्वर के हवाले कर देना चाहिए. इस अवसर पर काजी नजीर अहमद ने भी अपने विचार रखे. धन्यवाद ज्ञापन सदभावना मंच के संरक्षक अधिवक्ता हंसराज प्रसाद ने किया.
कार्यक्रम में सेवानिवृत एडीजे जुबैरूल हसन, पूर्व डीएम सैयद परवेज आलम, इंजीनियर जुबैर आलम, अधिवक्ता मो ताहा व शफी अहमद के अलावा पूर्व विधायक विनोद राय,
डा जेपी श्रीवास्तव, देवेंद्र नारायण यादव,गंगा प्रसाद, कमल सिंह चौरड़िया, विजय सिंह नाहला, सागर मल जैन, हनुमान मल, एमए मुजीब, कारी नियाज अहमद, डा नैयर हबीब, जाहिद अनवर, विजय कुमार नाहाय व दीना नाथ गुप्ता सहित दर्जनों गणमान्य लोग मौजूद थे.
विविधता में एकता है देश की पहचान, टकराव नहीं अमन जरूरी
आकृति संवारने पर नहीं आचरण पर देना होगा ध्यान
कार्यक्रम में कुरआन की आयतें पढ़ीं, तो गीता का पाठ भी हुआ